बरेली। निदा की ओर से शीरान रजा खां के खिलाफ घरेलू हिंसा के आरोप में चल रहे मुकदमे को हाईकोर्ट ने छह महीने में निस्तारित करने का निचली अदालत को आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में गैर जरूरी तारीख न देने का आदेश दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश मंगलवार को निचली अदालत की पत्रावली पर दाखिल भी कर दिया गया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में की गई शिकायत में निदा ने कहा कि शीरान से उनकी शादी 18 फरवरी 2015 को हुई थी। शादी में दिए गए दहेज से पति और ससुराल वाले खुश नहीं थे। शीरान के अलावा सास शिम्मी और ससुर उस्मान रजा खां, देवर ईकान ने डस्टर गाड़ी की मांग की। निदा के परिवार वालों ने इस पर लाचारी दिखाते हुए कहा कि वह पहले ही स्विफ्ट गाड़ी दे चुके हैं। कुछ दिन बाद ही ससुराल वालों ने घर से तमाम नौकरानियों को हटा दिया। घर के सारे काम निदा को करने पड़ते थे। उन्हें भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था। ससुराल वाले उनके साथ मारपीट भी करने लगे। इस बीच वह गर्भवती हो गईं। वह इस उम्मीद पर अत्याचार सहती रहीं कि शायद बच्चा होने के बाद ससुराल वालों का व्यवहार सुधर जाए। गर्भवती होने की खबर पर ससुराल वालों ने कहा कि यह परेशान कर सकती है, इससे पीछा छुड़ा लो। 16 जुलाई 15 को शीरान रजा ने उन्हें मारा पीटा और घर से निकाल दिया।
अपनी शिकायत में निदा ने कहा कि उन्हें उनके मां-बाप ने डॉक्टर को दिखाया। इलाज के बावजूद उनका गर्भपात हो गया। इस बीच उन्हें पता चला कि शीरान दूसरी शादी करना चाहते हैं। उन्होंने लड़की वालों को सारी बात बता दी। इस वजह से शीरान का रिश्ता वहां से खत्म हो गया। 8 मई 16 को सुबह नौ बजे शीरान, उसके भाई ईकान और दो लोग और उनके घर में घुस आए और उनके भाई को डंडों से मारना शुरू कर दिया। निदा ने कोर्ट में घरेलू हिंसा की शिकायत की। मामला लंबा चलता देख निदा ने हाईकोर्ट की शरण ली जहां अदालत ने मामले को छह महीने में तय करने का आदेश दिया है।
निदा के वकील भूपेंद्र भड़ाना ने यह आदेश मंगलवार को निचली अदालत में पत्रावली पर दाखिल भी कर दिया। हाईकोर्ट ने मुकदमे में गैर जरूरी तारीख न देने को कहा है। इस मामले में निचली अदालत में सुनवाई के लिए 11 फरवरी की तारीख तय की है।