बरेली। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) भी घपले का शिकार हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के विशेष सचिव डॉ. आदर्श सिंह ने इस योजना में बनाए गए स्वयं सहायता समूहों को चार साल में आवंटित करोड़ों के रिवाल्विंग फंड के दुरुपयोग की जांच के आदेश दिए हैं।
गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाकर स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2014 में मोदी सरकार ने यह योजना प्रारंभ की थी। इससे पहले यह स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाई) के नाम से चलती थी। पूर्व में इस योजना में पुरुषों के समूह बनाने के नाम पर सरकार के मिलने वाले करोड़ों के अनुदान का दुरुपयोग किया गया। बाद में जब भाजपा सरकार ने योजना का नाम बदला तो भी भ्रष्टाचार नहीं रुका।
नई योजना में सरकार महिलाओं के समूह गठित करने पर उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए 15 हजार रुपये का अनुदान (रिवाल्विंग फंड) भी देती है। चार साल से 15 ब्लॉकों में अब तक 2154 स्वयं सहायता समूह गठित कराने की कागजी खानापूरी की गई। मगर, इनमें अधिकांश समूह फर्जी तरीके से बनाए गए। इस वजह से सैकड़ों समूह निष्क्रिय हो गए। आलमपुर जाफराबाद, क्यारा समेत कई ब्लॉकों में डीआरडीए कर्मचारी ने अपने रिश्तेदार या परिवार की महिलाओं के नाम पर फर्जी समूह बनाकर सरकार द्वारा दिए जाने वाले रिवाल्विंग फंड का जमकर दुरुपयोग किया।
विहिप महानगर अध्यक्ष पवन अरोड़ा इस मामले की जांच कराने की मांग को लेकर डीएम और सीडीओ से मिल चुके हैं। दूसरी ओर बिथरी विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल ने भी सीएम को पत्र लिखकर एनआरएलएम के समूह गठन में बड़े पैमाने में हुए करोड़ों के फर्जीवाड़े की शासन स्तर से कमेटी बनाकर जांच कराने की मांग की थी।
कागजों में ब्लॉकवार स्वयं सहायता समूह
आलमपुर जाफराबाद- 302, बहेड़ी-168, भदपुरा-71, भोजीपुरा-150, भुता-135, बिथरी चैनपुर-129, फरीदपुर-166, फतेहगंज पश्चिमी-263, क्यारा-135, मझगवां-135, मीरगंज-89, नवाबगंज-106, रामनगर-97, रिछा-56, शेरगढ़- 69।
कुल समूह- 2102
लापता समूह- 54
निष्क्रिय - 600