बरेली। रबर फैक्ट्री की जमीन वापस लेने की राज्य सरकार ने कवायद तेज कर दी है। शनिवार को इस मामले की जानकारी लेने आए चीफ सेक्रेटरी के स्टाफ अफसर ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने सिटी मजिस्ट्रेट और एसएलएओ के साथ सर्किट हाउस में गुपचुप मंथन किया। स्टाफ अफसर ने कहा कि रबर फैक्ट्री का स्वामित्व राज्य सरकार के पक्ष में होना है। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन की ओर से एसएलएओ लेटर तैयार करें ताकि शासन में इसके लिए पैरवी तेज की जा सके। अभी जमीन सिंथेटिक एंड केमिकल लिमिटेड रबर फैक्ट्री के नाम है। अन्य संपत्ति के साथ इसकी बेशकीमती जमीन को भी बेचने की बात पहले कही जा रही थी।
फतेहगंज पश्चिमी में राज्य सरकार ने रबर फैक्ट्री लगाने के लिए 875 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई थी। सरकार की तरफ से इसका ट्रांसफर भी कंपनी को कर दिया गया था। रबर फैक्ट्री 1998 में बंद करने की घोषणा हो गई थी। इसके बाद इसकी संपत्तियों को नीलाम किया जाना है। यह मामला डेप्थ रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में विचाराधीन है। फैक्ट्री की भूमि सहित अन्य संपत्तियों की कीमत करीब 14 सौ करोड़ रुपये आंकी गई है। उद्यमी पहले संपत्ति के साथ जमीन बिक्री की भी कोशिश कर रहे थे, लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब प्रोजेक्ट ही बंद हो गया है तो सरकार रबर फैक्ट्री को दी गई अपनी जमीन वापस ले लेगी। शनिवार को सर्किट हाउस में मुख्य सचिव के स्टाफ अफसर त्रिपाठी ने सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला और भूमि अध्याप्ति अधिकारी सुल्तान अशरफ सिद्दीकी के साथ मीटिंग की। एसएलएओ ने रबर फैक्ट्री को लेकर चल रही प्रक्रिया के बारे में अवगत कराया। स्टाफ अफसर ने जमीन वापस लेने के लिए एसएलएओ को जरूरी प्रक्रिया पूरी करने और राज्य सरकार के नाम पत्र देने के निर्देश दिए। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि रबर फैक्ट्री के पास ही एक दूसरी फैक्ट्री की करीब 60 हेक्टेयर जमीन भी वापस लेने की कार्रवाई पूरी होनी है।