कांकर टोला के एक कान्वेंट स्कूल में फीस के लिए बच्चों को क्लास के बाहर खड़ा कर दिया गया। जब अभिभावकों को इसकी भनक लगी तो वे स्कूल में हंगामा करने पहुंच गए। अभिभावकों के विरोध के बाद बच्चों को टेस्ट में बैठाया गया। अब अभिभावकों को सोमवार तक फीस जमा करने का वक्त दिया गया है।
कांकर टोला स्थित जीनत कान्वेंट स्कूल में नर्सरी क्लास के कुछ बच्चों की फीस जमा नहीं हो सकी। शुक्रवार को बच्चों का टेस्ट था तो फीस के चक्कर में बच्चों को क्लास के बाहर खड़ा कर दिया। जब अभिभावकों को इसकी सूचना मिली तो वे स्कूल पहुंच गए और हंगामा करने लगे। स्कूल प्रशासन से उनकी नोकझोंक भी हो गई। अभिभावकों के विरोध के बाद बच्चों को क्लास में बैठाया गया। स्कूल संचालक कदीर अहमद का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर दबाव बना रहे हैं ताकि उनके बच्चे फ्री में पढ़ सकें । गरीब बच्चों की वह खुद फीस माफ कर देते हैं तो फीस के लिए बच्चों को बाहर क्यों खड़ा करेंगे।
नई समिति गठित, जल्द जारी हो सकता है आदेश
डीआईअेाएस अचल कुमार मिश्रा ने बताया कि फीस अध्यादेश आने के बाद फीस से संबंधित सारे मामले जिला स्तरीय कमेटी निस्तारित करेगी। समिति का गठन कर दिया गया है। इसमें स्कूल एसोसिएशन और अभिभावक संघ के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। एक दो दिन में इसका आदेश जारी होगा। अब उम्मीद है कि अभिभावकों को ज्यादा फीस से जल्द राहत मिल जाएगी। करीब 25 स्कूल हैं जहां ज्यादा फीस वसूली गई है। उसका समायोजन कराया जाएगा। डीएम के आदेश पर जल्द इसका लेटर जारी कर दिया जाएगा।
सात महीने की पढ़ाई और फीस पूरे साल की
शहर के कुछ कान्वेंट स्कूलों ने नौवीं और ग्यारहवीं की परीक्षाएं दिसंबर में ही कराने की तैयारी कर ली है। इसके बाद इन छात्रों का अवकाश घोषित कर दिया जाएगा। सिर्फ बारहवीं के छात्रों को पढ़ाया जाएगा। इसे लेकर अभिभावकों में रोष है। उनका कहना है कि जब स्कूल पूरे साल की फीस ले रहे हैं तो पूरे साल पढ़ाएंगे क्यों नहीं। दरअसल, कुछ स्कूल बारहवीं का रिजल्ट अच्छा करने के चक्कर में नौवीं और ग्यारहवीं के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने पर उतारू हैं। अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना का कहना है कि अगर बच्चा पांच महीने घर बैठेगा तो उसकी पढ़ाई प्रभावित होगी। बोर्ड एग्जाम के दौरान अवकाश करना समझ में आता है, लेकिन पांच माह का अवकाश क्यों किया जा रहा है। इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष पारुष अरोड़ा का कहना है कि कुछ स्कूलों में ही ऐसी बात सामने आ रही है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।