रिमझिम बारिश के बीच बम-बम भोले करते हुए जाते कांवड़ियों के जत्थों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कहीं डीजे की धुन पर थिरकते शिव भक्त तो कहीं गुलाल से ओतप्रोत आस्था। बहरहाल, सभी शिवभक्तों का हुजूम नाथ नगरी में केसरिया सैलाब बनकर पहुंचा। रविवार शाम ही कांवड़ियों के तमाम जत्थे मंदिरों तक पहुंच गए थे। सोमवार तड़के से ही भोलेनाथ के जयकारों के साथ जलाभिषेक शुरू हो गया। शहर में कई जगह कांवड़ियों का पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। मंदिर में खुराफातियों पर निगाह रखने के लिए पुलिस फोर्स समेत इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस मंदिर के अंदर और बाहर मौजूद रही।
सिविल डिफेंस के आईसीयू बृजेश पांडे ने बताया कि सभी मंदिरों पर वार्डन, पोस्ट वार्डन आदि ने व्यवस्था संभाले रखी। प्रत्येक मंदिर पर करीब 65 वार्डन तैनात थे। अनुमान के मुताबिक शाम तक एक लाख से अधिक कांवड़ियों ने बाबा का जलाभिषेक किया। भक्तों की भीड़ को देखते हुए दुकानदारों ने पुष्प, भांग, दीपक, बेर और बेल पत्र समेत दूध और प्रसाद के भाव बढ़ा रखे थे। तीन पत्तों वाले बेल पत्र दो से तीन रुपये प्रति पत्र बिके। मंदिरों के बाहर लगे मेले में पहुंचकर भक्तों ने चाट पकौड़ी आदि का आनंद लिया, तो वहीं बच्चों ने गुब्बारे आदि की खरीदारी की। मंदिरों में पैकेट में दूध लाने पर पाबंदी के बावजूद तमाम भक्त शिवलिंग पर पैकेट वाला दूध चढ़ाते नजर आए।
धोपेश्वर नाथ मंदिर
यहां रात से ही पहुंचे कांवड़ियों ने तड़के करीब तीन बजे कपाट खुलने पर भोलेनाथ पर जल अर्पित किया। इनके बाद स्थानीय लोगों ने भगवान का जलाभिषेक किया। आचार्य घनश्याम शास्त्री ने भक्तों को पूजन कराया। बाबा का विशेष रुद्राभिषेक भी किया गया।
अलखनाथ मंदिर
मध्यरात्रि में भस्म शृृंगार करने के बाद तड़के करीब ढाई बजे से ही कांवड़ियों ने बाबा का जलाभिषेक शुरू कर दिया। रात में कई जत्थे मंदिर में पहुंचे हुए थे। धीरे-धीरे भक्तों की संख्या मंदिर में बढ़ती चली गई। भीड़ अधिक होने से भक्तों को लंबा इंतजार करना पड़ा। महंत कालु गिरि ने शिव भक्तों को आशीर्वाद दिया।
मढ़ीनाथ मंदिर
सुबह सवा चार बजे ही पहुंचे कांवड़ियों ने सबसे पहले पूजन अर्चन किया। सुबह तीन बजे मंदिर खोल कर यहां व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। नाथ मंदिरों में शामिल इस मंदिर में सैकड़ों कांवड़ियों ने भगवान का रुद्राभिषेक किया।
वनखंडी नाथ मंदिर
सुबह करीब साढ़े तीन बजे मंदिर में पूजन-अर्चन के बाद भक्तों ने भगवान का जलाभिषेक किया। पहले से पहुंचे कांवड़ियों ने भगवान को जल चढ़ाया। दिन निकलते ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। महंत कुमार आनंद व मंदिर कमेटी की देखरेख में हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।
पशुपतिनाथ मंदिर
पीलीभीत बाईपास रोड किनारे स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में तड़के चार बजे से भक्तों का आना शुरू हुआ। सर्वप्रथम भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक हुआा। फिर कांवड़ियों के जत्थे भी जल चढ़ाने पहुंचे। भक्तों की भीड़ मंदिर में बढ़ती गई। देर शाम तक भक्तों ने दर्शन कर जल अर्पित किया।
तपेश्वर नाथ मंदिर
मंदिर समिति की ओर से कांवड़ियों के लिए हुए विशेष इंतजाम के अंतर्गत रात को ही सैंकड़ों कांवड़िए मंदिर में पहुंच गए थे। तड़के करीब तीन बजे ही मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। प्रदोष पूजन समेत अन्य अनुष्ठान भी मंदिर में हुए।
श्रीत्रिवटीनाथ मंदिर
सुबह साढ़े तीन बजे ही मंदिर में शिव का पूजन शुरू हो गया। मंदिर परिसर में ठहरे कांवड़ियों ने बाबा का सर्वप्रथम जलाभिषेक किया। फिर श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ को जल चढ़ाया। पुजारी पं. मुकेश ने बताया कि यहां भक्तों को दर्शन कराने के लिए मंदिर प्रबंध कमेटी ने विशेष इंतजाम किए हुए थे।
शिवालयों में लगी भक्तों में कतार
रिठौरा। नगर के प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर, शिवमंदिर, दूधा तालाब मंदिर, शिव मंदिर झीला पीपर मंदिर, शिवनारायण मंदिर, होली चौराहा मंदिर आदि पर सावन के पहले सोमवार को शिवभक्तों ने जलाभिषक कर पूजा अर्चना की। सुबह से ही मंदिरों में लंबी लंबी कतारें लगने लगीं। महंत अनंताचार्य ने बताया कि सावन में शिव भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।