बीएड कॉलेजों की फर्जीवाड़े की आंच विश्वविद्यालय पर न आए इसके लिए विश्वविद्यालय ने पहले ही इंतजाम कर लिए हैं। बीएड के प्रैक्टिकल शुरू होने से पहले ही कॉलेजों को बताना होगा कि जितने प्रवेश हुए हैं वो निर्धारित शिक्षण अभ्यास कार्य एवं आर्डिनेंस के तहत हैं। कॉलेज इसमें फर्जीवाड़ा न कर सकें इसके लिए कॉलेज के प्राचार्य और सचिव से नोटरी से सत्यापित शपथपत्र पर जवाब लिया जाएगा।
बीएड कॉलेजों में पिछले समय में कई गड़बड़ियां पकड़ में आईं। अक्सर राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यता मिलने से पहले ही कॉलेज प्रवेश ले लेते हैं और विश्वविद्यालय से परीक्षाएं भी करा लेते हैं। कॉलेजों के फर्जीवाड़े की आंच विश्वविद्यालय पर न आए इसलिए प्राचार्य और सचिव को शपथ पत्र पर देना होगा कि उन्हीं विद्यार्थियों का प्रैक्टिकल हो रहा है जिनका नियमानुसार प्रवेश हुआ।
80 फीसदी से ज्यादा अंक वालों की कॉपी सुरक्षित रखी जाएगी
विश्वविद्यालय ने प्रैक्टिकल कराने के नियम भी जारी किए हैं। छात्र अपना नाम और रोल नंबर परीक्षक को नहीं बताएगा। मूल्यांकन तीन परीक्षक लेंगे। इसमें शिक्षण अभ्यास के 100 अंक, 50 अंक मौखिक परीक्षा के होंगे। आंतरिक मूल्यांकन 100 अंक का होगा। जिन छात्रों के 80 फीसदी से अधिक अंक आएंगे उनकी कॉपी सुरक्षित रखी जाएगी। 80 फीसदी से अधिक अंक पाने वाले तीन छात्रों का सत्रीय कार्य और फाइनल पाठ योजना के रिकॉर्ड्स नमूने के तौर पर आंतरिक परीक्षक को सौंपे जाएंगे। ये रिकार्ड विश्वविद्यालय के समन्वयक को सौंपे जाएंगे। परीक्षा समाप्त होने के उसी दिन वाह्य परीक्षक को विश्वविद्यालय के पोर्टल पर अंक अपलोड करने होंगे और अगले दिन उसकी हॉर्ड कॉपी विवि को भेजनी होगी।