हेडिंग- सीडीओ साहब! इन गोमती की परिक्रमा पर तो खुद ‘गोमती’ भी प्रकट हो जातीं
सब हेड- 70 वर्ष की गोमती देवी पांच साल से वृद्घावस्था पेंशन के लिए काट रहीं विकास भवन के चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
महज 400 रुपये की पेंशन बनवाने के लिए इन गोमती ने समाज कल्याण विभाग की जितनी परिक्रमा की है, इतनी मेहनत करने पर तो खुद गोमती नदी भी प्रकट हो जाती। करीब 70 वर्षीय गोमती देवी की कहानी सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता को एक बार फिर उजागर कर रही है। यह बुजुर्ग करीब पांच साल से कांपते कदमों से विकास भवन बड़ी उम्मीद के साथ पहुंचती हैं कि शायद इस बार उसकी दीनहीन हालत पर अफसर, बाबुओं का दिल पसीज जाए, लेकिन समाज कल्याण का स्टाफ बुजुर्ग की पीड़ा दूर करने के बजाय सीधे मुंह बात तक नहीं करता।
शहर के हाता फाल्तूनगंज की गोमती देवी के पति सालिगराम को दुनिया छोड़े अरसा हो गया। बेटा बेरोजगार है। पति के गुजरने के बाद कुछ दिन तक उसे विधवा पेंशन मिलती रही, लेकिन बाद में वह भी अचानक बंद हो गई। इसके बाद समाज कल्याण विभाग में वृद्घावस्था पेंशन के लिए करीब पांच साल पहले दरखास्त दी थी, लेकिन वह मंजूर अब तक नहीं हुई। बैंक की पुरानी पास बुक और समाज कल्याण अधिकारी के नाम प्रार्थना पत्र लिए यह बुजुर्ग पांच साल के दौरान विकास भवन के अनगिनत चक्कर काट चुकी हैं, लेकिन सिस्टम को आर्थिक तंगी से बेहाल गोमती देवी से कोई हमदर्दी नहीं। उनका कहना है कि चार सौ रुपये पेंशन मिलने लगती तो किसी तरह अपना, अपने बेटे का पेट पाल लेतीं, पर यहां तो उनकी सुनने वाला ही कोई नहीं। समाज कल्याण के बाबू से कुछ कहो तो वे कुछ सुनने को ही तैयार नहीं होते। बस बोल देते हैं कि फार्म भर दो, पैसा जब आना होगा आ जाएगा। बूढ़ी काया कितनी दौड़ लगाए। घर से विकास भवन तक आते पैर कांप जाते हैं। धूप में आने से सर चकराने लगता है।
इनसेट
अफसरों ने नहीं सुनी तो दलाल ठग ले गया
पेंशन के लिए कई साल से परेशान घूम रहीं गोमती देवी की अफसर सुन नहीं रहे। इसका फायदा उठाते हुए करीब सालभर पहले कोई दलाल उसके पास आया। वह बोला, उसकी पेंशन पास हो चुकी है। 500 रुपये दे दो, खाते में पैसा आ जाएगा। बुजुर्ग का कहना है कि उसकी बातों में आकर पैसा दे दिया, लेकिन पेंशन आज तक नहीं मिली। उन्होंने बताया कि उन्होंने इसकी भी शिकायत की लेकिन कर्मचारियों ने उसकी दिक्कत एक कान से सुनी और दूसरे से निकाल दी।
इनसेट
कांप रही वृद्घा को अफसर ने
सिखाया ऑनलाइन का पाठ
गर्मी और तेज धूप में किसी तरह एक बार फिर समाज कल्याण विभाग के दफ्तर में पहुंची गोमती देवी ने एक बार फिर पेंशन न मिलने की शिकायत समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित से की। उन्होंने इस बुजुर्ग की दिक्कत का समाधान तो नहीं किया, बल्कि उसे ऑनलाइन आवेदन करने का पाठ जरूर पढ़ा डाला। हालांकि बुजुर्ग का कहना था कि उसे सही से अपना नाम लिखना तक नहीं आता, फिर वह फार्म कैसे भरेगी। इस पर विभाग के स्टाफ ने उसे वहां से टकरा दिया।
इनसेट
ऑनलाइन का पाठ पढ़ाते
व्यवस्था को लचर बनाते
बरेली। वृद्घावस्था पेंशन के लिए ऑनलाइन पाठ पढ़ाने वाले अधिकारी सिस्टम को लचर बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे। ऐसी ही व्यवस्था समाज कल्याण विभाग के ऑफिस में भी है। यहां पर वृद्घावस्था पेंशन का पूरा सिस्टम ऑनलाइन कर दिया गया है। यानी लाभार्थी को कम्प्यूटर पर अपना सारा डाटा ऑनलाइन करते हुए सारा ब्योरा देना होगा, जबकि पेंशन के लिए आने वाले 70 फीसदी से ज्यादा लोगों को अपने दस्तखत बनाने तक नहीं आते। बावजूद इसके विभाग के दफ्तर में ऑनलाइन फार्म भराने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पेंशन के लिए आने वाले लोगों से यह कहकर कन्नी काट ली जाती है कि वे बाहर जनसेवा केंद्र या किसी कैफे में पहुंचकर फार्म भरवाएं। बताते हैं, वहां 10 रुपये तय शुल्क के बजाय लोगों से 50 से 100 रुपये तक ऐंठ लिए जाते हैं। उधर, शासन ने यह आदेश भी जारी कर दिया है कि पेंशन के ऑनलाइन डाटा की हार्ड कॉपी अब समाज कल्याण विभाग में जमा नहीं होगी। इसके लिए लोगों को तहसील या बीडीओ कार्यालय जाना होगा।
वर्जन
गोमती देवी नाम की महिला उनके पास आई थी। उन्हें बता दिया गया है कि वह ऑनलाइन आवेदन करें। इतने लंबे वक्त से महिला की पेंशन इसलिए पास भी नहीं हो सकी है।
- अशोक दीक्षित, समाज कल्याण अधिकारी