908 गरीब बेटियों की शादी के लिए मिली 3.18 करोड़ रुपये की रकम खर्च करने से समाज कल्याण विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इस रकम को शासन को वापस भेज दिया गया है। सामूहिक विवाह योजना को लेकर अधिकारियों की लापरवाही से तंगी में गुजर बसर कर रहे सैकड़ों परिवारों का कल्याण समाज कल्याण विभाग नहीं कर पा रहा है। निर्धन कन्याओं की डोली उठने में गरीबी आड़े न आए, इसके लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में प्रत्येक गरीब जोड़े के लिए 35 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जानी है। इस योजना के नोडल डिपार्टमेंट समाज कल्याण विभाग को पहले 476 जोड़ों की शादी के लिए शासन ने 1.66 करोड़ की रकम दी, लेकिन अधिकारियों की हीलाहवाली से केवल 56 जोड़ों का ही विवाह हो सका। इस पर 19 लाख रुपये खर्च हुए। बाकी रकम बीडीओ और स्थानीय निकायों के अधिकारियों के खातों में डंप हैं। सामूहिक विवाह के लिए मिली पहले की रकम ही खर्च नहीं हो पाई, ऊपर से शासन ने 3.18 करोड़ की धनराशि और दे दी।
31 मार्च खत्म लेकिन पहले मिली रकम नहीं की सरेंडर
सामूहिक विवाह योजना को लेकर समाज कल्याण सहित अन्य विभागों की कोताही खत्म नहीं हो रही। समाज कल्याण विभाग के पास पूर्व में मिली 1.47 करोड़ की रकम भले ही खर्च न हो सकी हो, लेकिन 31 मार्च बीतने के बावजूद समाज कल्याण विभाग ने इस धनराशि को सरेंडर नहीं किया है। सामूहिक विवाह योजना की यह रकम खर्च न करने और अवशेष रकम को शासन को वापस न भेजने के मामले में समाज कल्याण अधिकारी पर शासन सख्त कदम उठा सकता है।
रामनगर के मामले में कार्रवाई के बाद ठप हो गई स्कीम
सामूहिक विवाह योजना को लेकर प्रशासन शुरूआत से ही दिलचस्पी नहीं ले रहा था। कुछ प्रयास के लिए कुछ जगहों पर शादी के आयोजन हुए भी तो आंवला के रामनगर में दस शादीशुदा जोड़ों के दोबारा विवाह कराने का मामला खुलने से अधिकारियों की खूब किरकिरी हुई। इस घटना के बाद से इस सामूहिक विवाह के जिम्मेदार बनाए गए बीडीओ और स्थानीय निकायों के अधिकारियों ने पूरी तरह से किनारा कर लिया।
सामूहिक विवाह के अभी पहले के बजट की ही काफी रकम बकाया है। इसलिए कुछ रोज पहले मिली 3.18 करोड़ की धनराशि को खर्च कर पाना मुमकिन नहीं था। यह रकम शासन को वापस भेज दी गई है। - अशोक दीक्षित, जिला समाज कल्याण अधिकारी