मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार बनने के तुरंत बाद 15 जून तक सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का फरमान जारी किया था। तय समय निकल गया लेकिन सीएम का ये फरमान पूरा नहीं हो पाया। पीडब्ल्यूडी ने अफसरों के सामने 80 फीसदी सड़कें गड्ढामुक्त करने का दावा करके बढ़ा चढ़ाकर आंकड़े पेश कर दिए लेकिन हकीकत ये है कि बरेली में 60 फीसदी सड़कें भी गड्ढामुक्त नहीं हो पाईं। हालांकि इसमें कोई शक नहीं कि सीएम के फरमान के चलते ग्रामीण संपर्क मार्गों के गड्ढे भरने का काम लंबे समय बाद हो पाया। पिछली सरकारों में पीडब्ल्यूडी का फोकस राज्य मार्ग और अन्य जिला मार्गों को चमकाने पर रहता था। गड्ढामुक्त सड़क की तारीख बढ़ाकर 30 जून करने से पीडब्ल्यूडी ने राहत की सांस ली है।
बरेली मंडल में पीडब्ल्यूडी को 4190 किलोमीटर से सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का टारगेट था। इसमें बदायूं सबसे बेहतर रहा। पीडब्ल्यूडी का दावा है कि वहां की अधिकांश सड़कें पहले से ही ठीक थीं। गड्ढामुक्त अभियान में यहां 90 फीसदी सड़कों के गड्ढे भरे गए। बरेली की 1344 किलोमीटर सड़कें गड्ढामुक्त होनी थीं। इनमें पीडब्ल्यूडी को अकेले 888 किलोमीटर सड़कें गड्ढामुक्त करनी थी जबकि बाकी काम जिला पंचायत, आरईएस, सिंचाई, गन्ना समितियों को करानी थीं। पीडब्ल्यूडी ने सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए जर्जर मार्गों को सामान्य मरम्मत, विशेष मरम्मत और गड्ढा मरम्मत के तीन हिस्सों में बांटा था। इसमें केवल गड्ढा मरम्मत पर ही काम किया गया। मार्गों का सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण नहीं हो पाया। हालांकि नवाबगंज के दो जर्जर मार्गों पर नवीनीकरण का काम चल रहा है। मीरगंज, शेरगढ़, शीशगढ़, बहेड़ी-शाही-शीशगढ़ मार्ग बेहद खराब है। ये मार्ग आधा बन चुका है। शहर में 56 किलोमीटर सड़कों को गड्ढा मुक्त करना था। बरेली की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने को 4 करोड़ रुपये मिले थे। तय समय सीमा में 60 फीसदी से भी कम सड़कें गड्ढा मुक्त हो पाई हैं।
मोरंग और बजरी मंहगी होने के बाद भी विपरीत परिस्थितियों में सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने का काम किया गया। 80 फीसदी लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। बाकी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का काम चल रहा है। 30 जून तक समस्त सड़कों को गड्ढामुक्त कर दिया जाएगा। संजीव भारद्वाज, एक्सईएन पीडब् ल्यूडी