आपने जानलेवा ब्लू व्हेल गेम के बारे में तो सुना ही होगा, जिसने दुनियाभर के कई बच्चों की जान ले ली। अब एक नया गेम जो दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है, वह है मोमो चैलेंज। यह भी एक सुसाइड गेम है। इस चैलेंज वाले गेम में टास्क की एक सीरीज होती है जिसके जरिए इसे खेलने वाला फाइनल टास्क तक पहुंचता है। फाइनल टास्क में प्लेयर को अपनी जान देने का चैलेंज दिया जाता है। भारत में इससे हुईं मौतों के दो मामले अब तक सामने आ चुके हैं। इस गेम को लेकर अब सीबीएसई बोर्ड ने भी अपनी एडवाइजरी जारी की है।
एडवाइजरी के मुताबिक बच्चों की इंटरनेट एक्टिविटी और व्यवहार पर नजर रखें। बच्चों से बात करें कि सोशल मीडिया पर वह क्या कर रहे हैं। इंटरनेट हिस्ट्री जरूर चेक करें। अगर बच्चे के शरीर पर कोई घाव या निशान है तो तुरंत उसके बारे में पूछे। स्कूल में भी बात करें, उनका बच्चा वहां कैसा व्यवहार कर रहा है और घर पर कैसा व्यवहार कर रहा है।
डीपीएस की प्रधानाचार्य रजनी सिंह का कहना है कि मोमो चैलेंज भारत में तेजी से बच्चों के बीच पहुंच रहा है। इसलिए सीबीएसई ने इससे बचने के लिए सर्कुलर जारी किया है, जो सभी अभिभावकों को भेज दिया गया है। साथ ही बच्चों को जागरूक कर रहे हैं। इस खेल के क्या नुकसान हैं, इससे कैसे बचा जाए, इसके बारे में बता रहे हैं। बच्चों की समय समय पर काउंसलिंग भी कर रहे हैं ताकि बच्चे इस गेम से दूर रह सकें।
मोरल क्लास में बच्चों को गेम से दूर रहने की दी नसीहत
बीबीएल स्कूल के प्रधानाचार्य और सीबीएसई के सिटी कोआर्डिनेटर दीपक अग्रवाल का कहना है कि सीबीएसई का आदेश आने के बाद अभिभावकों और बच्चों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। सुबह दस मिनट की मोरल क्लास लगा रहे हैं। अभिभावक बच्चों की इंटरनेट एक्टिविटी पर नजर रखें। अगर वह तनाव में है तो जरूर बात करें।
खतरनाक गेम से दूर रहने को घरवालों को किया सतर्क
एसआर इंटरनेशनल स्कूल की एमडी रूमा गोयल का कहना है कि सीबीएसई का आदेश आते ही अभिभावकों को मेसेज भेजा है। बच्चे मोबाइल पर जो भी एक्टिविटी करते हैं उस पर विशेष नजर रखें। मोमो चैलेंज बच्चों के लिए खतरनाक है। प्रत्येक क्लास में भी बच्चों को जागरूक कर रहे हैं।
अभिभावकों को भेजे संदेश, बच्चों को इंटरनेट से रखें दूर
जीआरएम के प्रबंधक राजेश जौली का कहना है कि सीबीएसई के हर आदेश से अभिभावकों को अवगत कराया जाता है। गेम्स और इंटरनेट से बच्चों को दूर रखने के लिए भी अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। घर में अभिभावक बच्चों की इंटरनेट एक्टिविटी पर नजर रखें। शिक्षक भी इंटरनेट और ऑनलाइन गेम्स को लेकर बच्चों को जागरूक कर रहे हैं।
बच्चों की इंटरनेट एक्टिविटी पर नजर रखें अभिभावक
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार कहते हैं कुछ खतरनाक गेम्स बच्चों की मनोदशा प्रभावित करते हैं। बच्चों को ऐसे गेम्स से दूर रखने के लिए जरूरत है। अभिभावक जागरूक हों। बच्चा इंटरनेट पर क्या एक्टिविटी कर रहा है उस पर नजर रखें। मोबाइल चेक करें। आजकल चाइल्ड लॉक आ रहे हैं उसका प्रयोग करें। अगर बच्चा अचानक परेशान रहने लगा है तो उससे बात जरूर करें।
क्या है मोमो चैलेंज
मोमो चैलेंज की शुरुआत अर्जेंटीना से बताई जा रही है। वहीं पर इसने सबसे पहले अपना शिकार बनाया था। गूगल पर अगर मोमो चैलेंज को सर्च करें तो एक पक्षी की फोटो मिलेगी, जिसका मुंह एक महिला का है, जो अजीब सा है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह चैलेंज गेम पहले फेसबुक पर शुरू हुआ, जहां लोगों को एक अनजान आदमी से अनजान नंबर के जरिए संवाद करने को कहा गया। ऐसी खबरें हैं कि इस गेम का लिंक वॉट्सऐप के जरिए प्रसारित हो रहा है।
मोमो चैलेंज में मिलती है टॉस्क की सीरीज
जो कोई भी एक बार इसकी चपेट में आया वह मोमो अकाउंट के जरिए उसे चुनौतियों की एक सीरीज मिलती है। गेम प्लेयर को इसे पूरा करना होता है ताकि वह अंत में मोमो से मिल सके। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें ज्यादातर टास्क हिंसक होते हैं और आखिरी में सुसाइड तक ले जाते हैं। अगर कोई बीच में टास्क पूरा करने से मना करता है तो मोमो उसे इसके लिए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देता है।