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बरेली में ग्लैंडर्स के शिकार हुए दो घोड़ों को दी जाएगी मर्सी डेथ

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बरेली। घोड़ों में फैलने वाली खतरनाक बीमारी ग्लैंडर्स से इंसानों को बचाने के लिए बरेली में इसका शिकार हुए दो घोड़ों को मर्सी डेथ यानी दया मृत्यु देने का फैसला हुआ है। इसके लिए डॉक्टरों की एक टीम बना दी गई है जो बुधवार को तमाम सुरक्षा उपायों के साथ राधामाधव स्कूल के सामने एक मैदान पर एक घोड़े को डेथ इंजेक्शन लगाएगी। ग्लैंडर्स से ग्रसित दूसरे घोड़े की मर्सी डेथ की तारीख अभी तय नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसी सप्ताह उसकी मर्सी डेथ की भी तारीख पक्की हो जाएगी।
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ग्लैंडर्स देश भर में घोड़ों को अपना शिकार बना रही है। बरेली के 12 हजार से ज्यादा घोड़ों में से पिछले महीने 60 घोड़ों के ब्लड सैंपल पशु पालन विभाग की ओर से जांच के लिए हरियाणा भेजे गए थे। हाल ही में इनकी जांच रिपोर्ट मिली है जिसमें रिठौरा में रहने वाले किशन बाबू और भोजीपुरा के गांव बोहित के अनोखेलाल के घोड़े में ग्लैंडर्स की पुष्टि की गई है। यह रिपोर्ट आने के बाद पूरे जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है। इसी के साथ पशुपालन विभाग की ओर से ग्लैंडर्स से ग्रसित दोनों घोड़ों को मर्सी डेथ देने का निर्णय लिया गया है। बुधवार सुबह दस बजे राधा माधव स्कूल के सामने मैदान में किशन बाबू के घोड़े को मर्सी डेथ दी जाएगी।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रामलखन और घोड़ों पर आठ सालों से काम रही साकार ब्रुक इंडिया संस्था के डॉ. दिनेश गुप्ता ने बताया कि चार डॉक्टरों की टीम इस काम को अंजाम देगी। टीम के ये सदस्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों से लैस रहेंगे। मर्सी डेथ देने की करीब 15 मिनट की प्रक्रिया में घोड़े को कोई तकलीफ नहीं होगी। मर्सी डेथ के बाद घोड़े के शव को छह फुट गड्ढे में दफनाने के साथ उसमें चूना और नमक डाला जाएगा। दूसरे घोड़े को मर्सी डेथ देने की तारीख तय नहीं है, लेकिन इसी हफ्ते उसे भी मर्सी डेथ दे दी जाएगी। घोड़ों के मालिक को मुआवजे के तौर पर 25 हजार रुपये भी सरकार की ओर से दिए जाएंगे। बता दें कि पिछले साल भी पांच घोड़ों को दया मृत्यु दी गई थी।
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पांच किमी दायरे में होगी सभी घोड़ों की जांच
ग्लैंडर्स का वायरस काफी खतरनाक होने के साथ काफी तेजी से फैलती है। लिहाजा जिन दोनों स्थानों पर ग्लैंडर्स बीमारी से पीड़ित घोड़े पाए गए हैं, उन गांवों के पांच किलोमीटर दायरे के सभी घोड़ों के खून के सैंपलों की जांच की जाएगी। उसके अगले पांच किमी की परिधि के घोड़ों में से भी 50 फीसदी घोड़ों के खून के सैंपल लेकर जांच को भेजे जाएंगे।

ग्लैंडर्स इंसानों के लिए जानलेवा
पशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश गुप्ता के मुताबिक घोड़ों में होने वाली यह बीमारी लाइलाज है। बीमार घोड़ों के संपर्क में रहने से यह बीमारी मनुष्य को भी हो सकती है। इस बीमारी से पीड़ित घोड़े अथवा मनुष्य की मौत तय है। बीमार पशु के मुंह और नाक से निकलने वाले तरल पदार्थ के संक्रमण से यह बीमारी दूसरे पशुओं या इंसानों में भी फैल सकती है।

ये होते हैं लक्षण
घोड़ों की त्वचा में फोड़े और गांठें, नाक के अंदर फटे हुए छाले दिखना। तेज बुखार होना, नाक से पीला पानी आना और सांस लेने में तकलीफ, खांसी आदि लक्षण होते हैं।
बचाव के उपाय: बीमार पशु की तत्काल जांच कराना चाहिए। स्वस्थ पशुओं को बीमार पशु से अलग रखना चाहिए। बीमार जानवर का चारा-पानी अलग रखना चाहिए। अन्य पशु और मनुष्यों में यह बीमारी न फैले इसके लिए बीमार पशु को अलग रखना चाहिए।
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