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कैंट इलाके के स्कूलों में सिफारिश पर दाखिले कराने के लिए पार्षदों ने खोजा नया रास्ता

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बरेली। चुनावी फायदे के लिए सेना का इस्तेमाल करने का एक मुद्दा देश भर में गूंज रहा है, करीब-करीब एक ऐसा ही मुद्दा कैंट बोर्ड में जन्म ले रहा है। मसला दरअसल कैंटोनमेंट एरिया में चलने वाले कॉन्वेंट स्कूलों में पार्षदों की सिफारिश पर दाखिलों का है। स्कूलों में ऐसी सिफारिशें चूंकि रद्दी की टोकरी में डाली जाती रही हैं, लिहाजा अब पार्षदों ने सेना के कोटे के जरिये इसका रास्ता साफ करने की रणनीति बनाई है। कैंट बोर्ड की इसी 30 अप्रैल को होने जा रही बैठक में उन्होंने 40 प्रतिशत डिफेंस एडमिशन कोटा में पांच प्रतिशत कैंट बोर्ड के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है।
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कैंट बोर्ड के पार्षदों की सियासी मजबूती पब्लिक उनकी स्कूलों में दाखिला कराने की कुव्वत से भी आंकती है। इसी के चलते पार्षद अक्सर एडमिशन के लिए सिफारिशी चिट्ठियां हाथों में लिए स्कूलों में चक्कर काटते दिख जाते हैं। यह अलग बात है कि स्कूल पार्षदों की सिफारिशों को ज्यादा भाव नहीं देते। सिर्फ पार्षद ही नहीं, यह समस्या कैंट बोर्ड के अधिकारियों के साथ भी है। पिछले महीने कैंट बोर्ड के पार्षदों में सेंट मारिया गौरेटी स्कूल में कुछ दाखिलों की सिफारिश की थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने दाखिले लेने से साफ इन्कार कर दिया गया। इस पर स्कूल प्रबंधन और पार्षदों के बीच काफी नोकझोंक भी हुई थी। पार्षदों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी सिफारिश कराई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अब इसके लिए नया रास्ता तलाश करने की कोशिश की जा रही है।
दरअसल कैंट एरिया में चलने वाले प्राइवेट और केंद्रीय विद्यालय की प्रत्येक क्लास में सेना का 40 प्रतिशत एडमिशन कोटा आरक्षित होता है। कैंट अधिकारी, कर्मचारी या पार्षदों को इन स्कूलों में एडमिशन के लिए कोई आरक्षण नहीं मिलता। पार्षदों की कोशिश है कि सेना के 40 प्रतिशत के कोटे में उन्हें भी पांच प्रतिशत हिस्सेदारी मिल जाए तो उनकी समस्या काफी हद तक सुलझ सकती है। कैंट बोर्ड की अगली बैठक में यह प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है।
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मुहर लगी तो बनेगा ‘इतिहास’
सूत्रों के मुताबिक कैंट एक्ट 1924 में बोर्ड के लिए कैंट स्थित निजी विद्यालयों में एडमिशन का कोटा आरक्षित नहीं है। अगर बैठक में चर्चा के बाद कैंट बोर्ड अध्यक्ष ने पांच प्रतिशत कोटा पर सहमति जता दी तो यह बरेली पहला कैंट बोर्ड होगा, जो छावनी क्षेत्र स्थित स्कूलों में कोटा के तहत एडमिशन की संस्तुति कर सकेगा। इसके बाद देश के 62 कैंट बोर्ड में भी यह फैसला लागू होने की मांग उठने के आसार हैं। कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष शिखा नायर और सदस्य मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि बैठक में बिशप कोनराड स्कूल और सेंट मारिया गोरेटी के प्रिंसिपल भी मौजूद रहेंगे।
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