बरेली। गठबंधन के बाद एक राजनीतिक दल में लोकसभा टिकट के लिए खुली बोली लगने लगी है। कुछ दावेदार तो टिकट के लिए चार से आठ करोड़ तक देने को तैयार हैं, लेकिन बदले राजनीतिक समीकरणों में एक पूर्व विधायक ने पड़ोस की लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने से हाथ पीछे खींच लिए। यह बार्डर पर सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
मंडल की पांच लोकसभा सीटों में दो से सीटें इस दल के हिस्से में आई हैं। इन पर कई दावेदार टिकट की लाइन में थे, मगर जब इनको रेट पता चले तो कुछ ने हाथ पीछे खींच लिए। फरीदपुर के एक पूर्व विधायक पड़ोस की लोकसभा सीट से पत्नी के लिए बहुत दिन से टिकट की कोशिश में लगे थे। पांच करोड़ सुनकर तुरंत बैक हो लिए। एक जगह चर्चा करते हुए बोले- मोहम्मदी के दावेदार ने ज्यादा की बोली लगा दी। अपने पास इतना रुपया नहीं। पहले टिकट खरीदो। फिर चुनाव में खर्च करो। बार्डर पर बवाल चल रहा है। कहीं छिड़ गई तो फिर मोदी लहर आ सकती है। गठबंधन के साथी भी उनका दर्द सुनकर दंग रह गए। आंवला सीट पर उसी दल के एक दिग्गज दावेदार ठोके हुए हैं। उनका मामला भी 3 से 5 खोखों में फंसा है। वैसे यहां से दो सवर्ण दावेदार तो आठ करोड़ भी देने को तैयार हैं। मगर, दल की शर्त है कि पिछड़े वर्ग के ही दावेदार को टिकट देंगे।