बरेली। नगर निगम के टैक्स अनुभाग के कर्मचारियों की हेराफेरी से नगर निगम को लाखों का चूना लगाए जाने का मामला सामने आया है। टैक्स अनुभाग में तमाम ऐसे भवन आवासीय श्रेणी में दर्ज हैं जिनका इस्तेमाल असल में व्यवसायिक तौर पर किया जा रहा है। पिछले दिनों एक होटल के नगर निगम के रिकॉर्ड में बतौर आवास दर्ज होने का मामला पकड़े जाने के बाद जांच शुरू कराई गई है। इस जांच में तमाम और ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि इस मामले में किसी की जवाबदेही करने से अधिकारी फिलहाल कतरा रहे हैं।
दस लाख से ज्यादा आबादी वाले नगर निगम क्षेत्र में सिर्फ 9486 व्यवसायिक भवन ही रिकॉर्ड में दर्ज हैं जबकि एक लाख 43 हजार 918 बतौर हाउस होल्ड पंजीकृत हैं। दिसंबर में हुई जांच में सामने आया कि सर्वे के बावजूद 14 हजार से अधिक आवासों की नगर निगम में फीड नहीं किया गया है। अब इनमें करीब नौ हजार भवनों की फीडिंग की जा चुकी है। इनमें से कई भवन ऐसे पाए गए, जिनका इस्तेमाल व्यवसायिक तौर पर किया जा रहा है, मगर वे रिकॉर्ड में फीड ही नहीं थे। पिछले सप्ताह होटल रोहिला का भी मामला पकड़ा गया था, जहां बार भी चल रहा था लेकिन निगम के रिकॉर्ड में यह भवन आवास के तौर पर दर्ज था। नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव के निर्देश पर कर निर्धारण अधिकारी ललतेश सक्सेना ने सभी जोन में व्यवसायिक भवनों की जांच शुरू कराई है। इसमें कई प्रापर्टी ऐसी सामने आई हैं, जो निगम के रिकार्ड में आवास दर्ज हैं लेकिन मौके पर दुकानें या कोई अन्य व्यवसायिक गतिविधि हो रही है।
शहर में व्यवसायिक संपत्तियां
जोन 1 : 2036
जोन 2 : 2766
जोन 3 : 2820
जोन 4 : 1864
नगर निगम के रिकॉर्ड में तो 9486 व्यवसायिक संपत्ति ही दर्ज हैं, मगर असल में इनकी संख्या ज्यादा है। जांच में तमाम व्यवसायिक संपत्तियों को आवासीय दिखाने के तमाम मामले सामने आ रहे हैं। इन सभी संपत्तियों का सत्यापन और पैमाइश कराकर दोबारा टैक्स लगाया जा रहा है। - ललतेश सक्सेना, कर निर्धारण अधिकारी