बरेली। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी शनिवार को शेल्टर होम की जरूरत का आकलन करने पहुंची। टीम ने डूडा अधिकारियों के साथ फरीदपुर और बहेड़ी में इसकी आवश्यकता का आकलन किया। रविवार को आंवला और हरूनगला के निर्माणाधीन शेल्टर होम का निरीक्षण होगा। इसके बाद नगर निगम के रैन बसेरों को भी शेल्टर होम में बदलने की कवायद शुरू होगी।
शहरी बेघरों को आश्रय मुहैया कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट काफी गंभीर है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को जमकर फटकार भी लगाई थी। इसके बाद शहरी क्षेत्र में जरूरत के मुताबिक शेल्टर होम बनाने की कवायद शुरू की गई है। बरेली में फिलहाल फरीदपुर, बहेड़ी, आंवला और हरूनगला में शेल्टर होम बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है। इसमें हरूनगला में शेल्टर होम का काम लगभग समाप्ति की ओर है। सुप्रीम कोर्ट की एक कमेटी डॉ. विनोद यादव के नेतृत्व में प्रस्तावित स्थलों एवं निर्माणाधीन शेल्टर होम की उपयोगिता एवं सुविधाओं का आकलन करने बरेली पहुंची है। शनिवार को टीम ने फरीदपुर एवं बहेड़ी का दौरा कर दोनों ही स्थानों पर शेल्टर होम की जरूरत को हरी झंडी दे दी। रविवार को यह टीम हरूनगला के निर्माणाधीन शेल्टर होम और आंवला में प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करेगी। पीओ डूडा विनय कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का मकसद है कि बेघरों को जहां सहारा दिया जाए, वह मानवीय गरिमा से युक्त हो। वहां प्रत्येक व्यक्ति के लिए कम से कम पांच गुणा दस फुट की जगह हो एवं रसोई समेत अन्य सुविधाएं हों।