जीवन शैली में बदलाव और भागदौड़ के बीच जहां नित नई बीमारियां सामने आ रही हैं, वहीं इनसे बचने के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। तात्कालिक लाभ के लिए एलोपैथी पर भरोसा करने वाले लोग ही अब इसके साइड इफेक्ट्स के चलते आयुर्वेद पर भरोसा जताने लगे हैं। इसका प्रमाण है, जिला अस्पताल के आयुष विभाग में तेजी से बढ़ रही रोगियों की संख्या। एक साल पहले तक आयुष विभाग में करीब आठ हजार मरीज आते थे लेकिन अब एक साल में 41 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें सैकड़ों मरीज ऐसे हैं, जो एलोपैथी से इलाज कराने के बावजूद फायदा न होने पर आयुर्वेदिक इलाज को तरजीह दे रहे हैं।
मरीजों ने कहा असरदार
आयुष विभाग पहुंच रहे मरीज ताहिर के मुताबिक उन्होंने छह महीने तक एलोपैथी से खुजली का इलाज कराया। दवा के असर से बीमारी फौरी तौर पर तो ठीक हुई लेकिन दवा बंद करते ही तकलीफ फिर बढ़ गई। सारे शरीर पर दाने उभरने लगे तो आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे। यहां दो माह की दवा में ही दाने और खुजली दोनों कम हो गए हैं। इनके अलावा आंवला से आए इरशाद अहमद, दुर्गानगर की सुनीता कुमारी, पुराना शहर के यज्ञवीर सिंह, ब्रह्मपुरा के इसरार के मुताबिक आयुर्वेद में देर भले ही लगती है लेकिन यह एलोपैथ से ज्यादा असरदार है।
दोनों पद्धतियों के बीच फर्क एलोपैथ आयुर्वेद
दवा के साइड इफेक्ट संभव कोई साइड इफेक्ट नहीं
क्रॉनिक डिजीज में कम कारगर कोर्स करें तो पूरा फायदा
डोजेज की मात्रा कम होती है वास्तविक सत्व होता है
दवा से लिवर, गुर्दा प्रभावित कोई वितरीत प्रभाव नहीं
पेट के लिए सिर्फ दर्द या गैस की दवा वजह पता कर संपूर्ण निदान
चर्म रोगों में कम प्रभाशाली चर्म विकारों का पूरा निदान