गोमूत्र और गोवंश का वैज्ञानिक महत्व आज भी बहस का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग सलाहकार पद्मश्री डॉ. एचआर नागेंद्र का इस मामले में कहना है कि पुराने चिकित्सा पद्धतियों को एविडेंस बेस्ड बनाने की जरूरत है, इसलिए गोमूत्र के वैज्ञानिक महत्व पर अनुसंधान होना चाहिए। बृहस्पतिवार को वह मुख्य अतिथि के रूप में रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 44वे स्थापना दिवस समारोह में मौजूद थे। डॉ. नागेंद्र तमिलनाडु स्थित डीम्ड यूनिवर्सिटी स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के वाइस चांसलर हैं।
गोमूत्र के महत्व के सवाल पर वह बोले, व्यक्तिगत रूप से वह इसका वैज्ञानिक आधार मानते हैं। लेकिन जब तक अनुसंधान नहीं होंगे और बड़े जर्नल में इसका प्रकाशन नहीं होगा, इसकी विश्वस्तर पर स्वीकार्यता नहीं होगी। अब तक गोमूत्र और पुरातन चिकित्सा पद्धति पर अनुसंधान न होने का कारण पूछने पर वह बोले- लोगों का पक्ष है कि आयुर्वेद तो पांच हजार साल पुराना है। एलोपेथी सिर्फ पांच सौ साल पुरानी है, तो हमें दोबारा क्यों कुछ प्रमाणित करने की जरूरत है।
योग से मधुमेह और कैंसर के इलाज पर चल रहा अनुसंधान
बरेली। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशन में स्वास्थ्य मंत्रालय लाइलाज मानी जाने वाली कैंसर और मधुमेह बीमारी के इलाज का हल योग में खोज रही है। जल्द ही इस मिशन को आयुष मंत्रालय अमलीजामा पहनाएगा। यह जानकारी डॉ. एचआर नागेंद्र ने दी। वह वर्ष 1982 से नरेंद्र मोदी से जुड़े हैं। इस संस्थान ने देश के 60 जिलाें के ढाई लाख लोगों की तीन माह तक योग स्क्रीनिंग की है। डॉ. नागेंद्र ने बताया कि उत्तर प्रदेश में किए शोध में बीस प्रतिशत डायबिटिक और दस प्रतिशत प्री-डायबिटिक लोग मिले हैं। यह गंभीर आंकड़ा है जो उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया है। उन्होंने बताया कि आयुष मंत्रालय की ओर से नियंत्रित मधुमेह भारत योजना बनाई गई है, जिसमें वह चेयरमैन हैं। कैंसर निवारण के लिए इंटीग्रेटेड कैंसर प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। योग अनुसंधान के निष्कर्ष के बाद कैंसर अस्पतालों में योग अनिवार्य कराया जाएगा। उन्होंने दिल्ली में इंडियन योग एसोसिएशन की स्थापना हुई है, जिसमें योग ऋषि रामदेव और श्रीश्री रवि शंकर, गायत्री परिवार व अन्य कुल 18 योगाचार्य मिलकर इन दोनों बीमारियों के योग से समाधान पर शोध कर रहे हैं।