शहर काजी और ताजुश्शरीया के बेटे असजद रजा खां की मदरसों में राष्ट्रगान न गाने की अपील के बाद ज्यादातर मदरसों ने राष्ट्रगान न गाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि तिरंगा फहराएंगे, जश्न मनाएंगे, मिठाइयां बांटेंगे और राष्ट्रगान की जगह, सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा... गाएंगे। अलबत्ता कुछ मदरसों का प्रबंधन असमंजस में है। उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी।
मदरसा दारुल उलूम मुफ्ती आजम हिंद के प्रबंधक मौलाना सिराज रजा खां कादरी का सीधे तौर पर कहना है कि मदरसों में राष्ट्रगान नहीं पढ़ा जाएगा। मदरसों में हमेशा से आजादी का जश्न मनाया जाता रहा है। झंडा फहरारा जाता रहा है मिठाईयां बंाटी जाती है। हमारे देश को सभी हिंदू मुस्लिमों ने मिल देश को आजाद कराया। इस लिए जंगें आजादी के सिपाहियों को याद किया जाता है। उनके बारे में बच्चों को बताया जाता है। यह कार्यक्रम अब भी होगा।
मदरसा काशीफुल उलूम के मुंतजिम मुफ्ती मोहम्मद मियां कासमी ने कहा है कि जहां तक आजादी के कार्यक्रम का सवाल है सभी मदरसों में होता है। जंगे आजादी के शहीदों को याद भी किया जाता है। उलमा ने हमेशा जंगे आजादी में बढ़ चढ़ हिस्सा लिया। इस लिए ऐसे कोई बात नहीं होनी चाहिए जो किसी को भी कोई एतराज हो। हमेशा वही काम हो जिसमें सब राजी हों और आपस में इत्तेहाद व मोहब्बत बना रहे।
मदरसा जाम-ए-वलिया अस के प्रधानाचार्य मौलाना समशुल हसन खां ने कहा मदरसों में नाचना गाना नहीं हो सकता। जहां से हमारे मजहब को गलत संदेश जा रहा है उससे हम परहेज करेंगे। जहां इस्लामी हदों से बाहर की बात है अगर वहां गाया जाता है तो इसमें कोई एतराज नहीं। किसी पर कोई भी बात को थोपना ठीक नहीं।
मदरसा तालिमुल इस्लाम गरीब नवाज, बिहार कलां के इंचार्ज मौलाना इमरान रजा बरकाती ने कहा कि मदरसा के लिए बोर्ड से मान्यता नहीं ली है। इसलिए हम शहर काजी की बात मानेंगे। राष्ट्रगान में कुछ ऐसे लब्ज हैं जो जिन्हें दोहराने की मरकज इजाजत नहीं देता। हम वतन से मोहब्बत करते हैं, हमारे यहां पढ़ने वाली बच्चियाें और बच्चों को हम वतन से मोहब्बत की सीख देते हैं। हर साल हम 15 अगस्त और 26 जनवरी के लिए पूरी इज्जत के साथ झंडा फहराते, दुआ करते, शहीदों के लिए फातेहा पढ़वाते हैं। मिठाई बांटी जाती है, हम राष्ट्रगान की जगह ‘सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा’ गाते आए हैं, इस साल भी यही कार्यक्रम किया जाएगा।
जामिया नूरिया रजविया, बाकरगंज के इंचार्ज मौलाना मोहम्मद हनीफ खान ने कहा कि हमारे पास कोई हिदायत आए या न आए, 15 अगस्त का दिन कौमी दिन है, हिंदुस्तान की आजादी का दिन हम मनाते आए हैं और इस बार भी मनाएंगे। शहर काजी की ओर से जो बयान आया है, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। सोमवार को अल्पसंख्यक विभाग जाकर पता करूंगा कि राष्ट्रगान मनाने को लेकर किस तरीके की हिदायत दी गई है। लिखित हिदायत के आधार पर ही कोई फैसला लेंगे।