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माफिया जब सेंट्रल जेलों की जमीन कब्जाएं तो कौन बच पाए

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बरेली। बीडीए के रवैये से शहर के रिहायशी इलाकों में ही अवैध कब्जे नहीं हुए बल्कि मिनी बाईपास से सटी सेंट्रल जेल की कीमती कृषि भूमि भी कब्जा ली गई। यही नहीं इस जमीन का न लैंड यूज बदलवाया गया न ही बीडीए से नक्शा स्वीकृत कराया गया, फिर भी बीडीए वालों की सांठगांठ से उस पर निर्माण शुरू कर दिया गया। फरवरी में इस मामले में जमीन पर कब्जा करने वाली आदर्श सहकारी आवास समिति और उसके खरीददारों पर एफआईआर दर्ज कराने के बाद जेल प्रशासन तीन महीनों से जमीन पर वापस कब्जा पाने के लिए पसीना बहा रहा है। अब यह रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है कि जेल की कितनी जमीन पर कब्जा कर कितने लोगों को उसका बैनामा किया गया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक की ओर से इस संबंध में एआईजी स्टांप से ब्योरा मांगा गया है।
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केंद्रीय कारागार प्रशासन के मुताबिक आदर्श सहकारी आवास समिति ने मिनी बाईपास के दक्षिण की ओर जेल की कृषि भूमि पर कब्जा कर उसे बेच दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराए जाने के बाद पिछले साल 26 मार्च और छह दिसंबर को राजस्व टीमों से यहां पैमाइश कराई गई जिसमें सरकारी जमीन अवैध कब्जे की पुष्टि हो गई। इसके बाद जेल अफसरों ने आदर्श सहकारी आवास समिति के अध्यक्ष और जमीन के खरीददारों के खिलाफ सात फरवरी को थाना इज्जतनगर में एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। हालांकि इसके बावजूद जमीन से कब्जा नहीं हटा। इसके बजाय कब्जेदारों ने बीडीए से बगैर लैंड यूज बदलवाए ही बिना नक्शे के जमीन पर निर्माण जरूर शुरू कर दिया।
अब जेल प्रशासन ने रजिस्ट्री विभाग से कब्जाई गई जमीन का रिकार्ड उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक की ओर से सहायक महानिरीक्षक निबंधक को पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई है कि गांव सुर्खा छावनी के गाटा संख्या 86, 185, 186, 192 और 194 में आदर्श सहकारी आवास समिति का कितनी भूमि पर कब्जा है और उसके सापेक्ष कितनी जमीन को बेच दिया गया है। इसके साथ आवास समिति के 13 अगस्त 2015 के बाद से कराए गए बैनामों की प्रमाणित प्रतियां भी उपलब्ध कराने को कहा है ताकि कब्जा हटाने की कार्रवाई की जा सके।
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बीडीए को भी चिट्ठी.. तत्काल रोकें निर्माण
केंद्रीय कारागार की जमीन पर कब्जा को लेकर वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बीडीए के अधिकारियों के साथ भी लिखापढ़ी की है। उन्हें भेजे गए पत्र में बताया गया है कि जेल की जमीन पर अवैध निर्माण कर रहे लोगों ने बीडीए से नक्शा पास नहीं कराया है। इसलिए बीडीए को जांच कराकर निर्माण पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया है कि तय नियमों के मुताबिक अगर कोई भी व्यक्ति जेल विभाग की सीमा से 100 फुट के अंदर किसी भवन का निर्माण करना चाहता है तो पहले उसे कारागार अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है। यह औपचारिकता भी पूरी नहीं की गई है।

जेल की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर रजिस्ट्री विभाग से रिकार्ड मांगे जा रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जेल की कितनी जमीन पर किन लोगों ने कब्जा किया है। इसके बाद इन कब्जों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। - अशोक कुमार, प्रभारी जेल अधीक्षक
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