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खाकी का कारनामा- मुकदमा दर्ज किया 8 साल पहले, रिपोर्ट दी 15 साल से गायब है मुल्जिम

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बरेली। तीन दिन के ही अंदर अदालत ने पुलिस का एक और खेल पकड़ लिया। पहले पुलिस ने एक पशु तस्कर की बाइक की बरामदगी का जिक्र अदालत को भेजे कागजों में नहीं किया था, अब एक ऐसे मुल्जिम को 15 साल से लापता बता दिया जिसे आठ साल पहले खुद नाजायज शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। अदालत ने मीरगंज पुलिस के दरोगा की इस करतूत को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी को जांच कराने के लिए लिखा है और 15 जून तक जांच रिपोर्ट भी मांगी है।
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मीरगंज के गांव गुलड़िया में रहने वाले भूरे लाल के खिलाफ 23 फरवरी 2011 को पुलिस ने नाजायज शराब रखने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। दो दिन बाद 25 फरवरी को ही भूरे लाल ने अपनी जमानत करा ली। कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान अगली तारीख पर 23 मार्च 2011 को लिया, लेकिन भूरे लाल जमानत कराने के बाद कभी अदालत में हाजिर नहीं हुआ। आठ साल तक यह सिलसिला चलने के बाद बाद अदालत उसका गैर जमानती वारंट कर दिया। इसके जवाब में एक अप्रैल 2019 को मीरगंज पुलिस ने अदालत में दाखिल की अपनी रिपोर्ट में बताया कि भूरे लाल ने गुलड़िया में 15 साल पहले ही अपनी सारी चल-अचल सम्पत्ति बेच दी थी और गांव छोड़कर चला गया था। अपनी रिपोर्ट के साथ पुलिस ने गांव की प्रधान रजनी शर्मा की ओर से जारी किया गया एक सर्टिफिकेट भी लगाया है।
अदालत में यह रिपोर्ट पहुंची तो यह मामला पकड़ लिया गया कि पुलिस ने जिस मुल्जिम को 15 साल से लापता बताया है, आठ साल पहले खुद ही उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रमोद कुमार ने कहा कि भूरे लाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट में उसका गुलड़िया का पता ही दिखाया गया। यहां तक कि विवेचक ने दौरान विवेचक ने अभियुक्त के बयानों में भी उसका यही पता लिखा है। अगर मुल्जिम संपत्ति बेचकर चला गया तो विवेचना में ही इसका पता लगना चाहिए था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुल्जिम अगर 15 साल पहले चला गया तो किस आधार पर उसके खिलाफ यह सारी कार्रवाई की गई। अदालत की ओर से एसएसपी को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने को कहा है। 15 जून से जांच रिपोर्ट भी पहले अदालत में भेजने की बात कही है।
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