बरेली। बरेली-पीलीभीत हाईवे के चौड़ीकरण के लिए मुआवजा देने में गोलमाल करने के मामले में अफसरों से पूछताछ तेज हो गई है। शासन स्तर पर चल रही जांच में कुछ रोज पहले जिला प्रशासन से भी कुछ रिकॉर्ड मांगे गए थे। एक अफसर की तरफ से इसका ब्योरा भी शासन तक पहुंचाया जा चुका हैं, हालांकि, अब तक कार्रवाई के आदेश जारी नहीं हुए हैं।
वर्ष 2012-13 में इस हाईवे के चौड़ीकरण के लिए जिला प्रशासन ने बडे़ पैमाने पर एनएचएआई को भूमि का अधिग्रहण कराया गया था। बताते हैं कि इसमें प्रशासन और एनएचएआई के कई अफसरों ने मिलकर मुआवजा घोटाले को अंजाम दे डाला। शासन में इस मामले की शिकायत भी पहुंची कि मनमाने तरीके से मुआवजा देने के लिए कई लोगों की कृषि भूमि को आवासीय दिखाकर उसका दो से तीन गुना तक मुआवजा बांटा गया है। इसमें अफसरों ने बंदरबांट करते हुए सरकार को मोटा चूना लगाया है। मामले की जांच प्रमुख सचिव राजस्व के स्तर पर चल रही है। पूर्व कमिश्नर जगनमोहन ने भी अपने स्तर से मामले की जांच कराकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। साथ ही इससे संबंधित सरकारी पत्रावलियां भी शासन को सुपुर्द की जा चुकी हैं। हालांकि, उसके बाद से मामले की जांच शासन स्तर पर ही चल रही है। सूत्र बताते हैं कि शासन ने इस प्रकरण को लेकर कुछ और दस्तावेज और जानकारियां मांगी थी। इसका रिकॉर्ड देने के लिए प्रशासन के उच्चाधिकारी लखनऊ भी जा चुके हैं। ऐसे में इस मामले में फंसे अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। हालांकि इसे लेकर स्थानीय स्तर पर उच्चाधिकारी कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं।