एमजेपी रुहेलख्ंाड विश्वविद्यालय के इंडो ईरानी सेंटर पर अब फारसी भाषा सीखना छात्रों के लिए आसान होगा। पर्सियन रिसर्च सेंटर की तरफ से एक हजार किताबें वितरित की गई हैं, जो भाषा सीखने में मददगार साबित होगी। यह किताबें छात्रों को ऑनलाइन भी मिलेगी और इसका ऑडियो भी इंडो ईरानी सेंटर पर ले सकेंगे। पर्सियन रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. एहसानोल्लाह शोकरोलाही मंगलवार को सेंटर पहुंचे। छात्रों से रूबरू हुए और भाषा रिसर्च पर जोर दिया।
डॉ. शोकरोलाही का कहना है कि करीब 1837 में भारत में फारसी ही बोली जाती थी। फारसी भाषा के शब्द आज भी हिंदी भाषा में प्रयोग होेते हैं। उन्होंने कुछ शब्दों के बारे में बताया कि जैसे, शादी, अनार, सेब, बाबा, बब्बर, अदालत जैसे शब्द भी फारसी है। आज भी हिंदी भाषा में तमाम शब्द फारसी के हैं। उन्होंने कहा कि भारती लोग इसलिए आसानी से फारसी भाषा सीख सकते हैं। उन्होंने बताया कि ईरान में भारतीय साहित्य से जुड़ी तमाम किताबें प्रकाशित हैं। वहां के लोग भारतीय संस्कृति को किताबें में देख रहे हैं। वहीं भारत में भी तमाम किताबें ईरानी कल्चर पर प्रकाशित हैं। अब अंबेसी भी भाषा के रिसर्च पर फोकस कर रही है। उन्होंने बताया कि रिसर्च सेंटर ने गामे अव्वल एक किताब प्रकाशित की गई है। यह पीडीएफ और आडियो में भी उपलब्ध है। इससे फारसी सीखना आसान होगा। उन्होंने सेंटर के छात्रों को यह किताब भी प्रदान की। वहीं सेंटर के प्रभारी प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल ने बताया कि सेंटर पर फारसी सीखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।