मच्छरों से निपटने के लिए इस बार एडी हेल्थ कार्यालय में गंबुसिया मछलियों को तैयार किया गया है। कमिश्नर के सामने इसका एक डेमो भी दिखा दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मत्स्य विभाग को पत्र लिखकर ऐसी ही और मछलियां मंगाई है ताकि पूरे शहर में इनको इस्तेमाल कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब की सूची एसडीएम से मांगी गई है जहां मछलियाें को छोड़ा जाएगा।
गंबुसिया मछली को जापानी बुखार से निपटने का बड़ा हथियार बनाया गया। गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल में इन मछलियाें के सहारे ही बरसात में खुले तालाबाें और जलभराव वाले स्थानों पर लार्वा को खत्म कराया गया था। अब इनका प्रयोग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी होगा। एंटीमोलॉजिस्ट डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि यह बात साबित हो चुकी है कि फॉगिंग से मच्छर केवल बेहोश होते हैं मरते या कम नहीं होते। इसी तरह केमिकल के छिड़काव में भी कई तरह के नुकसान है। इसलिए गंबूसिया मछली को जेई मच्छरों के लार्वा से निपटने के लिए प्रयोग में लाया गया। डेंगू और मलेरिया में कोई भी मछली प्रयोग में लाई जा सकती हैं।
एंटीमोलॉजिस्ट डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि मछली को लोग सीमेंट के टंकी और कूलर में भी डाल सकते हैं। यह किसी तरह नुकसानदेह नहीं है। सीएमओ डॉ. विजय यादव ने बताया कि ये मछलियां जेई की रोकथाम में ज्यादा फायदेमंद हैं। सभी एसडीएम को पत्र भेजकर उनसे ब्लाकवार तालाबों की सूची मांगी गई हैं। यह सूचना लखनऊ भेजी जाएगी।
एंटीमोलॉजिस्ट ने कमिश्नर के सामने डेमो दिखाया जिसमें मछलियाें ने मच्छराें के लार्वा को एक मिनट में खाकर खत्म कर दिया। मछलियाें के उपयोग से कुछ फर्क दिखेगा।
-डॉ. प्रमिला गौड़, एडी हेल्थ