देश भर में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोना के मरीजों में सुधार भी रहा है लेकिन उसकी तुलना में संक्रमित होने वाले विस्फोटक स्थिति में हैं। सात तारीख को भी बरेली में कोरोना के मामलों का आंकड़ा 102 तक जा पहुंचा।
उधर, मेडिकल बोर्ड की जांच में पीलीभीत बाईपास स्थित दर्पिन अस्पताल को कोरोना की दूसरी लहर के दौरान एक संक्रमित को निगेटिव बताकर भर्ती रखने और लापरवाही से इलाज करने से उसकी मौत के लिए जिम्मेदार माना है। मेडिकल बोर्ड ने उच्चाधिकारियों को दी अपनी रिपोर्ट में अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
सीएमओ ने इस मामले में जांच के लिए जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. एएम अग्रवाल, एसीएमओ डॉ. हरपाल सिंह और तीन सौ बेड कोविड अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. पवन कपाही को मेडिकल बोर्ड में नामित किया था। जांच अधिकारियों के मुताबिक कोविड की दूसरी लहर के दौरान मोहम्मद जाहिद नाम के शख्स दर्पिन अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुए थे। जाहिद की मौत के बाद उनके परिवार के सदस्य रिजवान ने थाना बारादरी में तहरीर देकर दर्पिन अस्पताल के डॉ. दर्शन मेहरा पर लापरवाही से इलाज का आरोप लगाया था।
इस मामले में 23 दिसंबर 2021 को गठित मेडिकल बोर्ड ने जाहिद के इलाज संबंधी सभी अभिलेख, प्रमाण पत्र और साक्ष्यों की जांच की। इसमें पता चला कि जाहिद 20 से 29 अप्रैल तक दर्पिन अस्पताल में भर्ती रहे थे। उन्हें सांस संबंधी बीमारी के साथ मधुमेह था। उन्हें बगैर एंटीजन या आरटीपीसीआर जांच कराए अस्पताल ने भर्ती रखा गया। परिवार ने जाहिद की शाहजहांपुर के कटरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोविड जांच कराई थी जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जांच में साबित हुआ कि मरीज के संक्रमित होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उसे निगेटिव दिखाकर इलाज किया। जांच रिपोर्ट में मेडिकल बोर्ड ने कार्रवाई की संस्तुति की है।