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सावधान! खतरे में हैं शहर के तमाम होटल और अस्पताल

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बरेली। शहर में एक के बाद एक कई व्यावसायिक इमारतों में अग्निकांड होने के बाद आखिरकार अग्निशमन विभाग की नींद खुल गई है। विभाग के अधिकारियों ने उन सभी इमारतों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है जो बीडीए से एप्रूव न होने के साथ दूसरे कई सुरक्षा मानकों के नजरिये से भी दुरुस्त नहीं हैं। एफएसओ की ओर से जारी नोटिस में फिलहाल शहर के कई प्रतिष्ठित अस्पतालों के साथ होटल निशाना बने हैं। कई अस्पतालों की एनओजी रिजेक्ट की गई है तो कई को एनओसी देने से इंकार कर दिया गया है। होटलों को मानक पूरे न होने पर नोटिस दिए गए हैं।
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कुछ समय पहले डेलापीर रोड पर साईं और मिनी बाईपास के नवोदय अस्पताल में भीषण अग्निकांड हुआ था। दोनों अस्पताल इसके बाद कई बार अग्निशमन विभाग से एनओसी मांग चुके हैं, लेकिन उन्हें एनओसी देने से इंकार कर दिया गया है। कई और अस्पतालों की बीडीए स्वीकृत न होने और दूसरे मानक न पूरे करने पर एनओसी रिजेक्ट कर दी गई है। लिहाजा शहर में अब तमाम अस्पताल अग्निशमन विभाग की एनओसी के बगैर चल रहे हैं। एफएसओ सोमदत्त ने बताया कि 40 बेड के अशोक किरन अस्पताल का नक्शा बीडीए से पास नहीं है। इसलिए उसकी एनओसी रिजेक्ट की गई है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप गंगवार का अस्पताल व्यावसायिक श्रेणी में नहीं है। घरेलू भवन में बाद में बगैर अनुमति लिए ही दो मंजिल और बना ली गई हैं। उसे भी एनओसी देना खतरे से खाली नहीं है। खुशलोक अस्पताल का बाहरी कैंपस ठीक है पर अंदर शेल्टर इतने क्लोज हैं, जिनमें आग से बचाव की गुंजाइश ही नहीं है। कर्मचारी नगर रोड पर बना सुशीला देवी अस्पताल का नया भवन भी कॉमर्शियल श्रेणी का नहीं है। इसलिए इन अस्पतालों को भी एनओसी नहीं दी गई है। कई और अस्पताल मानक पूरे नहीं कर रहे। उन्हें भी एनओसी नहीं दी जा रही। इन अस्पतालों के खिलाफ अब बाकी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग और बीडीए को करनी है।

जंक्शन रोड के होटलों को नोटिस
अग्निशमन विभाग जंक्शन रोड के अधिकांश होटलों को नोटिस जारी किए हैं। एफएसओ के मुताबिक होटल बरेली, होटल के बरेली, पंचम होटल, डी ग्रांड होटल समेत शहर के अन्य इलाकों के होटलों को भी नोटिस जारी किया गया है। इनको यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर जल्द मानक पूरे न किए गए तो विभाग कार्रवाई करेगा।
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एसएसडी प्लाजा की रिपोर्ट तैयार
एसएसडी प्लाजा में हुए अग्निकांड की रिपोर्ट तैयार हो रही है, जिसके मुताबिक इमारत में आने-जाने का एक ही रास्ता था। अग्निशमन सिलिंडर भी नहीं थे। एफएसओ ने बताया कि अपना पक्ष रखने के लिए गुरुवार को एसएसडी प्लाजा के मालिक को बुलाया गया था पर वह नहीं आए। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। अब दूसरे कॉमर्शियल कॉंप्लेक्स का निरीक्षण कर वहां भी मानकों को देखा जाएगा।

अब सबको लेनी होगी एनओसी
पिछले साल तक 15 मीटर से कम ऊंचाई और पांच सौ मीटर से कम क्षेत्रफल वाले घरेलू या व्यावसायिक भवनों को अग्निशमन विभाग की एनओसी की जरूरत नहीं होती थी। अब 16 फरवरी 2018 को जारी नए शासनादेश में यह राहत खत्म कर दी गई है। प्रमुख सचिव गृह ने सभी विभागों को यह पत्र भेजकर निर्देशित किया है कि हर छोटे या बड़े व्यावसायिक भवन को एनओसी लेनी होगी।

अस्पताल या होटलों में मानक पूरे कराने की जिम्मेदारी बीडीए जैसी संस्थाओं की है। बीडीए से भवन एप्रूव्ड हो जाते हैं तभी जांच कर हम उन्हें एनओसी दे देते हैं। कई अस्पतालों और होटलों में मानक पूरे नहीं हैं। कई संकरे रास्तों पर हैं तो कई में आने-जाने का एक ही रास्ता है। ऐसे संस्थानों को अब हमने एनओसी देने से इंकार कर दिया है। आगे की कार्रवाई हम कर नहीं सकते, यह संबंधित विभागों का विषय है। - सोमदत्त, एफएसओ
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