बरेली। नगर निगम का कुतुबखाना में मल्टीलेबिल पार्किंग बनाने का प्लान ध्वस्त हो गया। कुतुबखाना में मल्टीलेबिल पार्किंग निर्माण का नक्शा बीडीए ने निरस्त कर दिया है। नक्शा निरस्त करने की वजह यह रही कि नगर निगम ने मल्टीलेबिल पार्किंग के लिए जो जमीन तय की थी, उस पर अपना स्वामित्व साबित नहीं कर पाया। आपत्तियों का निस्तारण न कर पाने की वजह से भी नक्शा निरस्त कर दिया गया। इसी के साथ ही कुतुबखाना में वाहनों के जाम से मुक्त करने के लिए मल्टीलेबिल पार्किंग बनाने की कार्ययोजना महीनों के कवायद के बाद बेकार चली गई।
नगर निगम ने पूर्व नगर आयुक्त राजेश कुमार श्रीवास्तव के कार्यकाल में कुतुबखाना में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर मल्टीलेबिल पार्किंग निर्माण कराने की प्लानिंग की थी। पार्किंग निर्माण का काम दिल्ली की फर्म को दिया गया था। दिल्ली की फर्म पार्किंग निर्माण के नक्शे में एतिहासिक घंटाघर इमारत, पुरानी पार्किंग, पुलिस चौकी, पराग बूथ और प्राइवेट दुकानदारों का भी लगभग 500 वर्ग मीटर एरिया शामिल कर लिया था। इसमें कई विभागों से एनओसी भी नहीं ली गई थी और बीडीए को मानचित्र सीधे ऑनलाइन भेज दिया गया था। बीडीए ने इसमें छह प्रमुख आपत्तियां लगाकर इन आपत्तियों को दूर करने के लिए मल्टीलेबिल पार्किँग का मानचित्र नगर निगम को वापस कर दिया था। नगर निगम और बीडीए के बीच इस मुद्दे पर काफी दिनों तक तनातनी चलती रही। अब बीडीए ने उन आपत्तियों का निस्तारण न करने पर नगर निगम का मल्टीलेबिल पार्किंग का नक्शा निरस्त कर दिया।
यह वजह रही नक्शा निरस्त होने की
1- 266 वर्ग मीटर जमीन पर नगर निगम अपना स्वामित्व साबित करे
2- पुलिस चौकी और दुकानदारों पर नगर निगम अपना स्वामित्व साबित करे
3- बेसमेंट, ग्राउंड, फर्स्ट फ्लोर पर पार्किंग अनिवार्य रूप से करनी होगी
4- प्रस्तावित दुकानों के निर्माण से पहले पार्किंग के लिए जमीन कहां छोड़ी जाएगी
5- पुलिस चौकी, पराग पार्लर, ट्रांसफार्मर, पंप हाउस और इज्जतघर का प्रस्तावित मानचित्र में मिलान क्यों नहीं है?
6- घंटाघर एतिहासिक इमारत है। उसको न तो गिराया जाएगा, न ही सार्वजनिक सड़क पार्किँग में शामिल की जाएगी।
पार्किंग में 40 दुकानों के निर्माण की थी योजना
मल्टीलेबिल पार्किंग में ग्राउंड और फर्स्टफ्लोर पर ठेकेदार फर्म 40 दुकानें बनाना चाहती थी। उसके ऊपर मल्टीलेबिल पार्किँग बनाने की योजना थी। सेकेंड फ्लोर पर चौपहिया या दोपहिया वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। बीडीए ने बेसमेंट, ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर पार्किंग की अनिवार्य शर्त रख दी।