बरेली। लोकसभा चुनाव में इस बार जाति-बिरादरियों में भी कांटे का मुकाबला देखने को मिला। बरेली और आंवला लोकसभा सीटों पर भाजपा के पक्ष में जहां ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, साहू, कायस्थ, लोध, मौर्य, शाक्य, सैनी, कश्यप, कुर्मियों के अलावा अन्य पिछड़ी और दलित जातियां एकजुट थीं। वहीं सपा-बसपा गठबंधन के पक्ष में मुस्लिमों के अलावा यादव और जाटवोें की लामबंदी थी।
बरेली लोकसभा में जातियों की टक्कर भी थी। सपा-बसपा गठबंधन की तरफ सबसे ज्यादा वोट बैंक मुस्लिम था। उस वोट बैंक के साथ यादव और जाटव के अलावा अन्य जातियों में इक्का-दुक्का मतदाताओं का वोट भी गठबंधन को गया। कुछ कर्मी वोट भी सजातीय प्रत्याशी होने की वजह से गठबंधन के पक्ष में थे। इनके अलावा गठबंधन प्रत्याशी भगवत सरन गंगवार के व्यक्तिगत प्रभाव वाले वोट भी गठबंधन को मिले। इसके उलट भाजपा प्रत्याशी संतोष गंगवार ने सवर्णों में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ, पंजाबी, सिंधी, पिछड़े वर्ग में कुर्मी कश्यप, मौर्य, शाक्य, साहू-राठौर, प्रजापति के अलावा दलित जातियों में बाल्मीकि, धानुक, धोबी, पासवान के अलावा जाटव और मुस्लिम (आंशिक) का भी वोट मिला। दोनों ही दलों ने एक दूसरे के वोट जातियों के आधार पर काटे। मुस्लिम वोटों में 15 से 20 प्रतिशत का रुझान कांग्रेस की तरफ रहा। उधर आंवला में ठाकुर वोट सजातीय प्रत्याशी होने की वजह से कांग्रेस की तरफ गया। हालांकि कुछ ठाकुर वोट भाजपा में भी रहा। वहीं बसपा के पक्ष में यादव, मुस्लिम और जाटवों के अलावा जाट, गुर्जर और वैश्य बिरादरी के वोटों का भी कुछ हिस्सा उधर गया। इसके विपरीत भाजपा के पक्ष में कुर्मी, कश्यप, शाक्य, मौर्य, बाल्मीकि, धोबी, धानुक, साहू, वैश्य, पासवान समेत अन्य जाति रहीं। दोनों लोकसभा सीटों पर मतदान को लेकर जातियों के बीच भी मुकाबला दिखा।