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मैं क्या खिलौना हूं जब चाहे खेल लिए जब चाहे फेंक दिया

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बरेली। आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान ने कहा कि उनके शौहर शीरान रजा खान ने सजा से बचने के लिए हमेशा शरीयत की आड़ ली है। शरीयत का जब जैसा चाहा, वैसा इस्तेमाल करने की कोशिश की। जब सजा का डर लगा तो कह दिया वह उन्हें शरई तौर पर तलाक दे चुके हैं। अब फिर कानूनी तौर पर घिरने लगे तो समझौते के बात करते हुए बगैर हलाला उन्हें रखने को तैयार हो गए। अदालत में फर्जी तलाकनामा लगाया है, लेकिन वह कोई खिलौना नहीं हैं कि जब चाहे खेल लिए और जब चाहे फेंक दिया।
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निदा खान ने कहा कि इतने जुल्म-ज्यादती और रुसवाई करने के बाद शीरान कैसे सोच सकते हैं कि यह रिश्ता दुबारा बन पाएगा। उन्हें तो यह शुबहा है कि इस पेशकश के पीछे कोई साजिश तो नहीं। उन्हें तो बिल्कुल नहीं लगता कि आगे कुछ ठीक रह पाएगा। हो सकता है मुकदमा वापस लेने के बाद शीरान उन्हें फिर तलाक दे दें। ऐसे हालात में तो वह कुछ कर भी नहीं पाएंगी। निदा ने कहा कि जो तलाकनामा शीरान ने अदालत में पेश किया था. उनकी तरफ से उसे चैलेंज किया गया था। 13 फरवरी 2018 को अदालत ने तलाक को अवैध करार देते हुए हर्जे खर्चे का आदेश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि उन्हें बीवी के तौर पर कानूनी हुकूक मिले। इसके बाद जब घरेलू हिंसा का मामला आया तब शीरान ने फिर दावा किया कि वह उन्हें तलाक दे चुके हैं। लिहाजा शरई तौर पर उन पर घरेलू हिंसा का केस नहीं बनता। अदालत ने शीरान की यह अपील भी खारिज कर दी और उनके मुकदमे को बहाल रखा।
निदा ने कहा कि यह सिलसिला यह साफ करने को काफी है कि जब भी फंसने की नौबत आती है तब शीरान शरीयत का बेजा इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में मुफ्ती खुर्शीद आलम ने जब उन्हें इस्लाम से खारिज करने का एलान किया था तब भी शरीयत को मुद्दा बनाया गया था। ऐसे ही अब जब शीरान की सजा का वक्त करीब आया तो बिना हलाला उन्हें वापस ले जाने की हामी भर दी। लेकिन अब वह अच्छी तरह वाकिफ हो चुकीं है कि शीरान जब चाहे शरीयत का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या आम लोगों के लिए शरीयत अलग है और आला हजरत खानदान के लिए अलग।
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उलमा अब क्यों खामोश.. जवाब दें
मुझे तो इस्लाम से खारिज कर दिया था, अब अपनाने को कैसे तैयार
निदा ने कहा कि जब उन्होंने शबीना का ससुर से हराम हलाला कराने के खिलाफ आवाज उठाई तो उन पर फतवा जारी कर उन्हें शरीयत से बाहर करने का एलान कर दिया गया। अब उलमा जवाब दें कि क्या इन पर कोई फतवा नहीं बनता। तब तो उनके खिलाफ फतवे में कहा गया था कि जो निदा और उनके परिवार से मिलेगा, वो इस्लाम से खारिज माना जाएगा। अब शीरान और उनका परिवार ही उन्हें ले जाने को तैयार है। अब मुसलमानों को इनकी हकीकत को समझ लेना चाहिए। कौम इल्म हासिल करे और अंधविश्वास से बाहर आए।
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