बरेली। आईवीआरआई ओवरब्रिज के काम अभी रेंग रहा है, जबकि रेलवे का काम पूरी तरह से ठप पड़ा है। आधा-अधूरा पड़ा यह प्रोजेक्ट से हर दिन वहां से गुजरने वाले सैकड़ों-हजारों पब्लिक के लिए परेशानी खड़ा कर रहा है। ऐसे में मार्च तक इस प्रोजेक्ट के पूरे होने की उम्मीद भी नहीं दिखाई दे रही है।
आईवीआरआई पुल का निर्माण करीब 54.67 करोड़ से पूरा होना है। इसमें रेलवे को भी क्रासिंग के ऊपर पुल के हिस्से का काम 19.31 करोड़ खर्च करके बनाना है। इस ओवरब्रिज को बनाने में सेतु निगम के अधिकारी काफी धीमी गति से काम करा रहे हैं। जबकि रेलवे के हिस्से का काम ठप होने से इस प्रोजेक्ट के पूरा होने में लगातार देरी हो रही है। गौरतलब है, आईवीआरआई ओवरब्रिज के लिए रेलवे को भी क्रासिंग पर अपने हिस्से में अंडरपास और पुल बनाने का काम पूरा करना है। रेलवे ने पिछले महीने अंडरपास बनाने का काम शुरू किया था, उसे बीच ही अधूरा छोड़ दिया गया है। इसके अलावा रेलवे ने अपने हिस्से में आने वाले ओवरब्रिज के बीम और छत का काम भी नहीं शुरू किया है। ऐसे में लोग आधे-अधूरे अंडरपास से ही गुजरना शुरू हो गए है। वहीं पास में ही रेलवे ने अंडरग्राउंड सिग्नल लाइन बिछाने का काम भी शुरू कर दिया है। ऐसे में वहां से गुजरने वाले लोग आए दिन गड्ढे में गिर रहे हैं।
सुरक्षा मानक फिर दरकिनार, अफसर बेपरवाह
-आईवीआरआई ओवरब्रिज बनाने के दौरान सेतु निगम के अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों के परवाह न करने पर सेफ्टी ऑडिट टीम ने निरीक्षण किया था। उस वक्त अफसरों ने कार्रवाई से बचने के लिए सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त कराने की कोशिश की थी लेकिन अब फिर से हालत खराब हो गई है। रेलवे क्रासिंग के पास पुल के नीचे खतरे का आगाह करने वाली तख्तियां गायब हो चुकी है। पुल के चारों तरफ लगाई गई सेफ्टी रिबन भी पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। क्रासिंग के पास ही इन दिनों पुल के बीम के नीचे लोहे के गाटर आदि को जोड़ने के लिए वेल्डिंग का काम चल रहा है, जबकि वहीं पास में भी नैनीताल रोड पर टैंपो वालों के खड़े रहने से हर वक्त काफी पब्लिक रहती है। लोगों को पुल से दूर रखने के लिए नैनीताल रोड पर भी लोहे की बैरीकैडिंग लगाई गई थी लेकिन रेलवे के पुराने गेट के पास जूते की दुकानें लगी है। वहीं पर बैरिकैडिंग को लोगों ने हटा कर निकलना शुरू कर दिया है। लेबर भी एक बार फिर बगैर सेफ्टी बेल्ट और हेलमेट के काम कर रहे हैं। टूटी सर्विस लेन को भी अब तक सही नहीं किया गया है। इधर, लालफाटक ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान भी सुरक्षा इंतजाम तार-तार हैं। सर्विस लेन बनाने का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मरों की शिफ्टिंग न होने से वे सर्विस लेन के बीच में आ गए हैं। इससे एक्सीडेंट की संभावना बनी हुई है। मंदिर को भी दूसरी जगह पर नहीं स्थापित किया जा सका है। पुल के एक तरफ दीवार न बनी होने से मिट्टी व रेता सड़क पर आ जाने से वहां अक्सर कीचड़ हो जाता है।
सेटेलाइट और चौपुला पुल के काम के लिए डिजाइन अब तक नहीं मिला
चौपुला फ्लाईओवर के लिए 59.42 करोड़ और सेटेलाइट के लिए 26.78 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हो गया है। सेतु निगम के अधिकारियों ने वहां दफ्तर बनाने का काम भी शुरू कर दिया है लेकिन अभी दोनों ही फ्लाईओवर के लिए अब तक गाजियाबाद तकनीकी विंग से फाइनल डिजाइन तैयार होकर नहीं आया है। इससे इस पुलों के निर्माण का काम भी लटका हुआ हैै।
सुरक्षा मानकों को लेकर जो भी कमियां रह गई हैं, उन्हें फिर से दुरुस्त कराया जाएगा। आईवीआरआई में रेलवे के अधिकारियों के काम न शुरू किए जाने का सवाल है तो संबंध में सोमवार को मीटिंग बुलाई गई है। -वीके सेन, उप परियोजना अधिकारी, सेतु निगम्र