बीते कई बरसों से ठीक-ठाक सर्दी दिवाली के बाद ही होती थी। मगर इस बार सर्दी दिवाली से पहले दस्तक दे सकती है। इसकी वजह मानसूनी बारिश का सामान्य से डेढ़ गुना अधिक होना है। 15 दिसंबर के बाद जनवरी तक पारा शून्य या इससे नीचे भी जा सकता है। खेतों में नमी की वजह से भूगर्भ जलस्तर बढ़ने से भी ठंड का प्रकोप अधिक रहेगा।
बीते चार या पांच साल से सामान्य 950 मिलीमीटर से औसतन 30 फीसदी कम बारिश होती रही है। इस बार सितंबर के पहले हफ्ते में ही बारिश 1250 मिलीमीटर का आंकड़ा पार कर चुकी है। उत्तराखंड में पहाड़ों पर सामान्य से दो गुनी से भी ज्यादा बारिश हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अभी सितंबर में 150 से दो सौ मिलीमीटर या इससे अधिक बारिश और हो सकती है। ज्यादा बारिश का असर रुहेलखंड के आस-पास मैदानी इलाकों पर पड़ना तय है। सितंबर मेें ही अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस या इससे कम देखने को मिल रहा है। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा. एचएस कुशवाहा ने बताया कि भूगर्भ जल स्तर बढ़ने की वजह से जमीन के अंदर नमी बनी हुई है। मानसूनी बारिश रुकने के बाद भी जमीन की नमी बनी रहेगी। इससे सर्दी समय से पहले पड़ने लगेगी। दिवाली के बाद सर्दी का बढ़ना शुरू होगा जो दिसंबर के तीसरे हफ्ते में उग्र दिखेगा। पहाड़ों पर बर्फ ज्यादा पड़ेगी, जिसके फलस्वरूप मैदानी इलाकों में कोहरे का प्रकोप अधिक देखने को मिलेगा।