कॉन्वेंट स्कूलों से टक्कर लेने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने इस साल 105 स्कूलों का इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई के लिए चयन किया। इसमें अंग्रेजी पढ़ाने के लिए टीचरों की भी तैनाती की गई, लेकिन ये नाम के ही इंग्लिश मीडियम हैं। बच्चे यहां हिंदी मीडियम में ही पढ़ाई कर रहे हैं। वजह यह है कि शासन अब तक इन स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम का कोर्स ही मुहैय्या नहीं करा सका है और न ही इसके जल्द आगे मिलने की उम्मीद ही है।
इस शैक्षिक सत्र में इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई के लिए मार्च में प्रत्येक ब्लॉक में पांच-पांच स्कूलों का चयन किया था। बाद में इनकी संख्या बढ़ाते हुए अप्रैल में इन स्कूलों की संख्या 105 कर दी गई। इन विद्यालयों में पढ़ाने के लिए परिषदीय स्कूलों में ही तैनात शिक्षकों की बाकायदा लिखित परीक्षा और काउंसलिंग कराई गई। लंबी प्रक्रिया के बाद इन स्कूलों की शुरूआती तैयारियां पूरी की गईं। मगर, इस सारे किए कराए पर शासन की लेटलतीफी ने पानी फेर दिया। इन स्कूलों में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों को अब तक इंग्लिश मीडियम का कोर्स ही नहीं दिया जा सका है। मजबूरी में शिक्षक बच्चों को हिंदी मीडियम में पढ़ाई करा रहे हैं।
शिक्षकों की ट्रेनिंग अभी बाकी
अंग्रेजी मीडियम स्कूलों के लिए टीचरों की तैनाती तो कर दी गई, लेकिन विभाग ने अब तक इन्हें ट्रेनिंग ही नहीं दी है। शिक्षकों का कहना है कि डायट में अगर उन्हें दो हफ्ते का विशेष प्रशिक्षण दे दिया जाए तो उन्हें बच्चों को पढ़ाने में काफी सहूलियत रहेगी।