चमचमाती सड़कें, रात में जगमग लाइटें और हरियाली, कैंट क्षेत्र की पहचान हुआ करती थी। वो रौनक तो अब दिखाई नहीं देती, ऊपर से गड्ढा युक्त सड़कें, टूटे डिवाइडर व रेलिंग, आधी अधूरी जलती सड़क की लाइटों ने कैंट इलाके की सूरत ही बिगाड़ दी है। कई बार लोगों की शिकायत के बाद भी महीने दर महीने गुजर गए और सड़क निर्माण कैंट बोर्ड व एमईएस के पास में अटका हुआ है।
यह वह सड़कें हैं जो करीब एक साल से ज्यादा पहले की टूटी पड़ी हैं। इन सड़कों से आम नागरिकों सहित आर्मी अफसरों से लेकर स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों के सैकड़ों रिक्शे गुजरते हैं। बावजूद इसके बिशप कानरॉड रोड, बिशप चौराहा, नटराज रोड, सेना अस्पताल मार्ग और बीआई बाजार का गांधी चौक बदहाल हालत में है। बिशप चौक से नटराज तक डिवाइडर टूट चुका है। इस पर लगा रेलिंग तक टूटकर सड़क के दोनों ओर फैल गया है, जो रात में कभी भी किसी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार स्कूटर और रिक्शा आदि इसमें फंसकर गिर भी चुके हैं। कमोवेश यही हाल सदर की सड़कों का भी है।
इन सड़कों का मसला यह है कि कुछ दूरी की सड़कें कैंट बोर्ड की हैं तो कुछ एमईएस की, जिस कारण यह काम अटका पड़ा है। बिशप कानरॉड रोड और एटीएम चौराहे से गांधी चौक तक सड़क कैंट बोर्ड की है, तो नटराज से सेना अस्पताल रोड एमईएस की है, जबकि सदर का पूरा इलाका कैंट बोर्ड के हिस्से में आता है। इसकी निर्माण की जिम्मेेदारी पूरी तरह कैंट बोर्ड की है।
उधर, कैंट बोर्ड के अभियंता आरके माहेश्वरी का कहना है कि इन सड़कों का निर्माण जल्द से जल्द कराया जाएगा। इसके स्टीमेट तैयार कर लिए गए हैं। इसमें सदर की सड़कें भी शामिल हैं। अब की बोर्ड मीटिंग के बाद निर्माण कार्य करा दिया जाएगा।