नालंदा विश्वविद्यालय में दस हजार छात्रों को दो हजार शिक्षक शिक्षा प्रदान करते थे, तक्षशिला विश्वविद्यालय में भी हजारों की छात्रों और शिक्षकों की संख्या सैकड़ोें में थी। भारत समेत पूरी दुनिया के विद्वान यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे। अब ऐसे संस्थानों को फिर अस्तित्व में लाने के लिए फिर पहल हुई है। मानव संसाधन मंत्रालय वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूशंस के नाम से 10 नए शैक्षिक संस्थान बनाने जा रहा है।
ये संस्थान केंद्रीय, राज्य, डीम्ड यूनिवर्सिटी से अलग होंगे। इसका शैक्षिक ढांचा कैसा होना चाहिए इसके लिए देश के शैक्षिक संस्थान, शिक्षकों और संगठनों से सुझाव मांगे गए हैं। यूजीसी ने वेबसाइट पर पब्लिक नोटिस जारी किया है। वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूशंस में ऐसी प्रतिभाओं के लिए वही माहौल होगा जो उनको दूसरे देश के संस्थान में नजर आता है। देश-विदेश के चुनिंदा शिक्षक चुने जाएंगे। प्रतिभावान छात्रों को स्लॉकरशिप की सुविधा होगी। इनका संचालन एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। विदेशी छात्रों के लिए भी इन संस्थानों का रास्ता खुला रहेगा। तमाम कोर्स के साथ यहां ओपन कोर्स भी किए जा सकेंगे। यूजीसी की वेबसाइट से सीधे अपने सुझाव दिए जा सकते हैं। पूरे देश से आने वाले सुझावों को ध्यान में रखते हुए देश में दस चुनिंदा वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूशंस स्थापित किए जाएंगे जो दुनिया के टॉप टेन संस्थानों को शिक्षा के क्षेत्र में चुनौती देंगे। इन संस्थानों का चुनाव केंद्रीय, राज्य, आईआईटी, प्राइवेट संस्थानों में से इंटरनेशनल रैंक से किया जाएगा।
वर्तमान में देश के शैक्षिक संस्थानों की गिनती दुनिया के टॉप दो सौ विश्वविद्यालयों में भी नहीं होती। शोध में हम मीलों पीछे हैं। दूसरे देश के छात्र आने की बात दूर की देश के प्रतिभावान छात्र दूसरे देशों को रुख करते हैं।
देश में संस्थान
-47 केंद्रीय विश्वविद्यालय
-353 राज्य विश्वविद्यालय
-123 डिम्ड यूनिवर्सिटी
-246 प्राइवेट यूनिवर्सिटी
कोट
नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय उदाहरण है कि शिक्षा के क्षेत्र में हम कहां थे। यूजीसी ने अच्छी पहल की है कि वर्ल्ड क्लास संस्थानों का खाका खींचने के लिए पूरे देश के शैक्षिक संस्थानों की राय को शामिल किया है।
-प्रोफसर वीपी सिंह, कोआर्डिनेटर यूजीसी रुहेलखंड विश्वविद्यालय