बाराबंकी। मवेशियों के लिए चारे का ऐसा संकट पहली बार हुआ है। भूसा तो दूर की बात धान के पुआल दाम भी आसमान पर हैं। भूसा आलू व धान से ज्यादा मंहगे दामों पर बिक रहा है। चूनी चोकर के दामों में पिछले साल की अपेक्षा भारी वृद्धि हो गई है। पशुपालक चारे के लिए शहर से लेकर गांव तक भटक रहे हैं। ऐसे विषम हालातों में अब दूध का दाम बढ़ाने की तैयारी भी हो रही है।
पशुपालन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस समय जिले में गाय, भैंस, बकरी व घोड़े आदि मिलाकर करीब साढ़े आठ लाख के आसपास मवेशी हैं, जबकि जिले में पशुपालकों की संख्या करीब 4 लाख है। जिले में गेहूं का भूसा 1400 से 1600 रुपए प्रति कुंतल में बिक रहा है, जबकि धान के पुआल को काटकर बनाया गया भूसा भी 1200 से 1300 रुपए में हैं।
शहर में केडी सिंह बाबू स्टेडियम के निकट सड़क किनारे लगने वाली भूसा मंडी में मिले हरख ब्लाक के मंगरवल गांव के नूर मोहम्मद ने बताया कि वे लोग गांवों से भूसा खरीदकर मंडी में लाते हैं। प्रति कुंतल 100 से 200 रूपए तक फायदा लेते हैं। अब गांवों में भी भूसे की भारी किल्लत हो गई है। गांवों में भी 1400 रुपए प्रति कुंतल के दर से खरीदना पड़ रहा है।
भूसा व्यवसायी असद ने बताया कि अयोध्या, बस्ती व पूर्वांचल के जिलों से भी भूूसा लाना पड़ रहा है। चारे की ऐसी किल्लत पहली बार देखी है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मार्कंडेय सिंह ने बताया कि भूसे के दामों में भारी वृद्धि हुई है। जिले के 39 गो-आश्रय स्थलों के लिए पिछले साल ही भूसे का टेंडर हो गया था, इसलिए कोई दिक्कत नहीं है। मार्च के बाद फिर टेंडर किया जाएगा।
धान से भी महंगा भूसा, गड़बड़ाया बजट
पशु पालक व किसान नेता रामकिशोर पटेल ने बताया कि भूसा, पुआल, चूनी, चोकर सभी इतना मंहगा हो गया है कि छोटे बड़े सभी पशुपालकों का बजट गड़बड़ा गया है। किसान का धान खुली बाजार में 1300 में बिक रहा है, मगर भूसे के दाम 1500 के पार जा रहे हैं। नसीरपुर के पशुपालक सत्यनाम ने बताया कि आलू का दाम 1000 रुपए तो धान का 1300 से 1400 रुपए के आसपास है, जबकि भूसा 1500 रुपए के आसपास बिक रहा है।
कोठी के पशुपालक रामू ने बताया कि चोकर के दाम 2500 से 2600 रुपए प्रति कुंतल हैं। पिछले साल चोकर के दाम 1700 से 1900 के बीच थे। ऊपर से भूसा इतना मंहगा हो गया है। अब दूध के दाम बढ़ाना हम सबकी मजबूरी है। जरौली के पशुपालक अशोक शुक्ला ने बताया कि अभी नया भूसा अप्रैल के अंत में ही आएगा। चारे की किल्लत के बीच भूसा व पुआल के दाम जिस तरह से बढ़े हैं, उससे साफ जाहिर है कि अभी चारे के इस संकट से निजात मिलने वाली नहीं है।