अभी तक नियम के बाद भी जब बाइक चालक ही हेलमेट नहीं लगाता तो पीछे बैठने वाला क्या लगाएगा। इसका उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना भी लगेगा लेकिन सिर्फ कागजों पर। जिले में अक्सर दिखावे के लिए अभियान चलता है लेकिन बस खानापूर्ति हो जाती है। पिछले एक साल में करीब 55 लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवा चुके हैं।
जिले में साल भर कागजों पर ही यातायात माह, सड़क सुरक्षा सप्ताह का कार्यक्रम सीमित रहता है। कैबिनेट में पास हुआ बाइक, स्कूटर, स्कूटी, मोपेड राइडर्स के साथ पीछे सीट पर बैठने वाले को भी सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट लगाने का नियम कोई नया नहीं है।
जब यातायात पुलिस बाइक राइडर्स को हेलमेट नहीं पहना सकी जिसके लिए पुलिस प्रशासन द्वारा यातायात माह व सड़क सुरक्षा सप्ताह जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। तो बाइक चालक व पीछे सीट पर बैठने वाले को हेलमेट पहनाने का कायदा यातायात पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।
जिले में दो पहिया वाहन चालकको को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करने के लिए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चेंकिंग लगाई जाती है। ऐसा न करने वाले करीब 500-600 चालान प्रतिमाह किए जाते हैं। हेलमेट पहनने में लापरवाही करने पर बीते एक वर्ष में 55-60 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। शुक्रवार को ऐसे कई लोग बिना हेलमेट के शहर में फर्राटा भरते नजर आए जिसमें से कई पुलिस महकमे के भी लोग थे।
जल्दी में अक्सर भूल जाते हेलमेट पहनना
देवा तिराहे पर शुक्रवार को फर्राटा भरते जगबेहटा निवासी सुभाष से हेलमेट न लगाने के संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने बढ़ा रूखा जवाब दिया कि मेरी मर्जी। वहीं स्कूटी से बाजार से खरीदारी कर लौट रही लखपेड़ाबाग निवासी डॉली ने बताया कि बाजार तक ही आई थीं इसलिए हेलमेट नहीं लगाया।
ला अस्पताल में आशा का कार्य कर रहीं मेनका हेलमेट लगाए अस्पताल के बाहर मिलीं। उनसे हेलमेट पहनने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कि हेलमेट मैं अपनी सुरक्षा के लिए रोज पहनती हूं। वहीं सिविल लाइन चौराहे पर एक बाइक सवार ने अपना हेलमेट बाइक के चेन से बांध रखा था। जिसने बताया कि हेलमेट जहां चेकिंग होते देखता हूं पहनकर निकल जाता हूं।
बाइक राइडर्स को हेलमेट पहनने के लिए समय-समय पर प्रेरित किया जाता है। पुलिस अधीक्षक के आदेश पर बीच-बीच चेकिंग कर चालान भी किया जाता है। लोगों से अपनी जान की सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनने के लिए कहा जाता है। यातायात नियम का उल्लंघन करने वालों को अब बक्शा नहीं जाएगा। -राजनाथ यादव, ट्रैफिक इंस्पेक्टर