बाराबंकी। बाराबंकी से गोरखपुर तक करीब 243 किमी रेल लाइन की विद्युत (ओएचई) सिस्टम की क्षमता दोगुनी करने का कार्य शुरू हो गया है। इस रूट पर बिजली क्षमता 25 हजार वोल्ट से बढ़ाकर 50 हजार वोल्ट हो रही है। छह माह में यह कार्य पूरा होने के बाद इस रूट पर मात्र एक किमी की दूरी में ही ट्रेनें 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। भविष्य में स्लीपर वंदेभारत व अमृत भारत जैसी ट्रेनों के संचालन का रास्ता भी साफ होगा।
दरअसल, पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन द्वारा इस रूट पर पहले से ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लागू किया जा चुका है, जिससे एक ही ट्रैक पर ट्रेनें कम अंतराल पर आगे-पीछे चल सकती हैं। अब अगला चरण बिजली आपूर्ति की क्षमता बढ़ाने का है।ताकि तेज गति से चलने वाली ट्रेनों को पर्याप्त कर्षण शक्ति मिल सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार वंदेभारत, अमृत भारत और अन्य तेज गति की ट्रेनों को चलाने के लिए एक किमी के दायरे में अधिक वोल्टेज की आवश्यकता होती है। यदि बिजली की आपूर्ति पर्याप्त नहीं होगी तो ट्रेन अपनी निर्धारित गति नहीं पकड़ पाएगी। इसी वजह से ओवरहेड विद्युत लाइन की क्षमता बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। बाराबंकी से गोरखपुर के बीच अब तक 6284 फाउंडेशन तैयार किए जा चुके हैं, जबकि 2334 मास्ट खड़े किए जा चुके हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अब विद्युत (ओएचई) सिस्टम को दो गुना करने के लिए वायरिंग शुरू की गई है।