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Barabanki News: खुले में बिना सुरक्षा के रखे ट्रांसफार्मर जानलेवा

Sat, 02 May 2026 01:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। ग्रामीण इलाकों में खुले में रखे ट्रांसफार्मर हादसों को दावत दे रहे हैं। सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी इस कदर है कि अधिकांश स्थानों पर जाली नहीं लगाई गई है। जहां लगाई भी गई थी, वे अब टूट कर बेकार हो चुकी हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ट्रांसफार्मरों से निकलती चिंगारियां और स्पार्किंग आम हो गई है, जिससे न सिर्फ ग्रामीणों बल्कि पशुओं की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में लोनीकटरा क्षेत्र के भवनियापुर गांव में जमीन पर खुले में रखे ट्रांसफार्मर की चपेट में आ जाने से किसान रामशरन वर्मा (58) था झुलस गए थे।
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दरियाबाद नगर पंचायत के कटरा मोहल्ला में खुले में ट्रांसफार्मर रखा है। इसके चारों तरफ सुरक्षा जाली नहीं है। ऐसे में यह ट्रांसफार्मर राहगीरों व स्थानीय लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। इसको लेकर कई बार पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन अभी तक इसके चारों ओर सुरक्षा जाली नहीं लगाई गई।
निंदूरा क्षेत्र के इटौंजा गांव में ट्रांसफार्मर लगा हुआ है, आसपास घास का मैदान होने के कारण पशु चरने आते हैं। खुले में रखे इस ट्रांसफार्मर की चपेट में निराश्रित पशुओं के आने का हमेशा डर बना रहता है। इसके बावजूद सुरक्षा के प्रबंध नहीं किए जा रहे हैं। रामसनेहीघाट क्षेत्र केे इब्राहिमाबाद गांव के किनारे ट्रांसफार्मर रखा है। बीते वर्ष बारिश में एक मवेशी करंट की चपेट में आ गया था, इसके बाद भी सुरक्षा जाली नहीं लगवाई जा सकी।
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यह होने चाहिए मानक-
ट्रांसफार्मर के चारों ओर कम से कम 10 फीट की दूरी तक लोहे की सुरक्षा जाली होनी चाहिए। ट्रांसफार्मर के टैंक और न्यूट्रल के लिए मजबूत अर्थिंग होनी चाहिए, जो बिजली के झटके और शार्ट सर्किट के जोखिम को कम करती है। ओवरलोड व शार्ट सर्किट होने पर बिजली आपूर्ति तुरंत रोकने के लिए ट्रांसफार्मर पर फ्यूज या सर्किट ब्रेकर लगा होना चाहिए। आंतरिक खराबी के कारण गैस बनने या तेल का दबाव बढ़ने पर टैंक को फटने से बचाने के लिए प्रेशर रिलीफ वाल्व होने चाहिए। ट्रांसफार्मर की बुशिंग की सफाई और तापमान की निगरानी समय-समय पर की जानी चाहिए।


बिना सुरक्षा उपकरण काम कर रहे बिजली कर्मी
रामसनेहीघाट पावर कॉर्पोरेशन के कोटवाधाम बिजली उपकेंद्र पर ठेकेदारी प्रथा से कार्य कराया जा रहा है। निजी कर्मचारी जान जोखिम में डालकर विद्युत लाइनों पर कार्य करते नजर आ रहे हैं। इन कर्मचारियों के पास सुरक्षा उपकरण और खंभों पर चढ़ने के यंत्र भी नहीं होते हैं। हादसा होने पर कॉर्पोरेशन और ठेकेदार दोनों ही जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। हाल ही में हराहरी फीडर पर अमनियापुर गांव के पास 11 हजार लाइन पर कार्य हो रहा था। यह कार्य ठेकेदार निजी कर्मियों से चिलचिलाती धूप में करा रहा था। उपकेंद्र का कोई भी कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं था। एसडीओ राजवीर सिंह ने लापरवाही करने वाले ठेकेदार पर कार्रवाई करने की बात कही है।
पावर कॉर्पोरेशन के अधीक्षण अभियंता राजबाला के अनुसार, शहर हो या गांव, ट्रांसफार्मरों के चारों ओर सुरक्षा जाली लगवाई गई है। जहां पर सुरक्षा जाली नहीं लगी है, वहां के लिए अधिशासी अभियंता व जेई की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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