रामलला जन्मस्थली अयोध्या और नवाबों की राजधानी लखनऊ के बीच स्थित इस जिले में तुलसी के राम की लीला यहां पर दिखती है। तुलसीदास ने बाल्मीकि के राम को अपने श्रीरामचरितमानस में जन-जन का राम बना दिया और श्रीरामचरितमानस जन-जन का कंठहार बन गई।
तुलसीदास ने अपने कृतित्व के जरिए समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया। यही वजह है कि यहां की रामलीला मुख्य रूप से श्रीरामचरितमानस पर ही आधारित होती है। शहर स्थित दशहराबाग की प्रतिष्ठित रामलीला की बात ही कुछ और है। लालटेन की रोशनी में शुरू हुई रामलीला गैसबत्ती युग से होते हुए चकाचौंध भरी लाइट तक पहुंच गई है।
दशहराबाग में हाइड्र्रोलिक मंच पर होती रामलीला
डेढ़ सौ वर्षों पहले पूर्वजों द्वारा डाली गई रामलीला की परंपरा वक्त के साथ और मजबूत होती जा रही है। घर में किसी वृहद आयोजन की तरह रामलीला के लिए सभी एकजुट होकर लीलाआें का मंचन करते कराते हैं। प्रभु राम के अयोध्या छोड़ने से लेकर रावण वध करने तक की लीलाएं हर वर्ष अपनी अमिट छाप छोड़ती है।
रामलीला में जिस सुसज्जित विमान पर सवार होकर भगवान राम व लक्ष्मण युद्ध करते हैं, वह 16 कहाराें के कंधाें पर रहता है। युद्ध के दौरान प्रयोग किए जाने वाले तीरों का नैमिसारण्य में विशेष रूप से निर्माण कराया गया है।
रामलीला में मंचन के लिए बनाया गया मंच हाइड्रोलिक पर आधारित होता है। जो जरूरत पड़ने पर मंच को ऊंचाई प्रदान करता है। यहां की विशेषता यह भी है कि यहां पर विजयादशमी के दिन रावण व मेघनाथ के पुतले रणक्षेत्र में चलकर युद्घ करते हैं। रावण दहन के समय शिवकाशी की आतिशबाजी सतरंगी छटा बिखेरेंगी। यहां पर इस बार 88 फुट का रावण का पुतला अहमद हुसैन द्वारा बनाया गया है।
हैदरगढ़ की रामलीला होती खास
अवध के कई जिलों में रामरसामृत सागर नाटक के आधार पर रामलीला का मंचन किया जाता है। स्व. रामजीमल द्वारा रचित नाटक पर इनके वंशज प्रत्येक वर्ष 12 दिनों तक रामलीला का मंचन करते हैं तथा नाटक के सभी पात्रों को भी स्वयं निभाते हुए गौरवशाली इतिहास को सहेजा जा रहा है। दोहा, चौपाई, कवित्त, सोरठा, छंदों, समत सवैया, कवित्त, लावनी यहां होने वाली रामलीला की विशेषता है। यहां पर 31 फुट का रावण पुतला जैदपुर के कारीगर द्वारा पुरुषोत्तम नरायन अग्रवाल की निगरानी में बनवाया जा रहा है।
फतेहपुर में चंदे से होती रामलीला
फतेहपुर कस्बे की ऐतिहासिक रामलीला करीब सैकड़ों वर्षों से मोहल्ला पचघरा में स्थित बाबा संगत के प्रांगण में मनाई जाती है। संगत के महंत शैलेंद्र मुनि ने बताया कि आज से करीब दस वर्ष पूर्व लोग कंधों पर श्रीराम का रथ लेकर चलते थे। इस रामलीला की खास बात यह है कि इस लीला में जो धन खर्च होता है उसे एकत्र करने के लिए कूपन का प्रबंध किया जाता हैै। रामचरितमानस पर आधारित राम जन्म से लेकर वनवास तथा रावण-वध तक की लीला का मंचन स्थानीय कलाकारों द्वारा किया जाता है। यहां पर 40 फुट का रावण स्थानीय कलाकार मो. रफीक द्वारा बनाया गया है।
चाक चौबंद रहेगी सुरक्षा व्यवस्था
रामलीला जहां पर भी होगी वहां पर भारी पुलिस बल तैनात किया जाएगा। विजय दशमी को लेकर सादी वर्दी में भी पुलिस तैनात की गई है। मेले में लगे सीसीटीवी कैमरे से पुलिस टीम नजर रखेगी। इसके अलावा भीड़ को नियंत्रित करने के लि रूट डायवर्जन किया गया है। यदि कहीं कोई माहौल बिगाड़ने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। -राजू बाबू सिंह, एसपी