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Barabanki News: अचानक बिगड़ी हालत... 24 घंटे में तीन मजदूरों ने तोड़ दिया दम; सड़क किनारे मिले दो के शव

Fri, 13 Jun 2025 05:58 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, बाराबंकी

सार

बाराबंकी में अचानक तबीयत बिगड़ने से 24 घंटे में तीन मजदूरों ने दम तोड़ दिया। एक का देवा में सड़क किनारे तो शहर में पेड़ के नीचे दूसरे का शव मिला। वहीं सफदरगंज में बेसहारा मजदूर ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
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अस्पताल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के बाराबंकी में भीषण गर्मी के बीच अलग-अलग घटनाओं में तीन मजदूरों की मौत हो गई। दो मजदूर सड़क किनारे मृत मिले। जबकि, एक ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। मौत के कारणों पर पुलिस जांच कर रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि गर्मी के प्रकोप ने इन मजदूरों की जान ले ली।

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लखनऊ के बड़ा चांदगंज निवासी रामचन्दर (75) करीब 10 वर्ष पूर्व सफदरगंज थाना क्षेत्र के उधौली गांव में भटकते हुए आ पहुंचे थे। वह राजगीरी कर जीवन यापन करने लगे। अब दो जून की रोटी के लाले पड़ने लगे तो उधौली स्थित एक टेंट की दुकान के मालिक यशवंत ने इनको लेटने के लिए बिस्तर व खाना देना शुरू कर दिया। 

एक वर्ष पूर्व हादसे में रामचन्दर की कमर की हड्डी टूट गई तो टेंट मालिक ने उपचार कराया। बृहस्पतिवार को रामचन्दर की अचानक तबीयत बिगड़ गई। जैदपुर सीएचसी से उनको जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां रात में उपचार के दौरान मौत हो गई। 

बहन के घर रहकर मजदूरी करता था

वहीं, सतरिख के मौथरी गांव निवासी रईश उर्फ गुड्डा (40) का शव शुक्रवार सुबह देवा-फतेहपुर मार्ग पर कांशीराम कालोनी के पास सड़क किनारे मिला। अविवाहित रईश अपनी बहन के घर रहता था और मजदूरी करता था। उसकी बहन ने मौके पर पहुंचकर पहचान की। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। 

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उधर, बदोसराय के मरकामऊ गांव निवासी जितेंद्र (39) बृहस्पतिवार को मजदूरी के लिए लखनऊ गया था। शाम को लौटते समय वह शहर में जैदपुर रोड के पास मृत हालत में मिला। परिजनों ने बताया कि जितेंद्र पूरी तरह स्वस्थ था और उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। पुलिस का कहना कि तीनों मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट होगा।

लावारिस नहीं बनने दिया शव, कराया अंतिम संस्कार

बुजुर्ग रामचन्दर के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद शव लेने कोई परिजन नहीं आया। ऐसे में टेंट कारोबारी यशवंत बेटे देवेंद्र ने उसे लावारिस नहीं बनने दिया। वे शव को अपने गांव भनवापुर ले गए और अंतिम संस्कार कराया।

मजदूरी बनी मजबूरी... जान बचाना चुनौती

इस समय जिले में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मजदूर पेट की आग बुझाने के लिए बाराबंकी से लेकर लखनऊ तक दौड़ रहे हैं। रोजी-रोटी की तलाश में निकले इन मजदूरों की मौत के बाद आम चर्चा है कि लगातार धूप और गर्मी ने ही इन्हें निगल लिया। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दे रही है, मगर हकीकत मजदूरों की विवशता को बयां कर रही है।

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