बाराबंकी। जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में संसाधनों की कमी से मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसके विस्तार का प्रस्ताव बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए तीन माह पूर्व भेजा गया था, लेकिन शासन से स्वीकृति न मिलने की वजह से यहां आने वाले मरीज धक्के खा रहे हैं या फिर निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1500 से 2000 के आसपास मरीज इलाज को पहुंच रहे हैं। इसी प्रकार ट्राॅमा सेंटर में प्रतिदिन 300 से 400 मरीज पहुंचते हैं। वार्ड हमेशा मरीजों से भरे रहते हैं, जिसके चलते गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। इसी को देखते हुए जुलाई 2025 में एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, जिसमें मांग की गई थी यदि ट्राॅमा को 40 बेड से बढ़ाकर 200 बेड का और इंडोर को 100 बेड से बढ़ाकर 300 बेड करने के अलावा एमआरआई, सेंट्रल एसी सिस्टम, वाटर एंड सीवेज ड्रेनेज सिस्टम को बढ़ा दिया जाए तो मरीजों को काफी लाभ मिलेगा। इसके अलावा ईएमओ, फार्मासिस्ट, स्टॉफ नर्स, वार्ड ब्वाय आदि की संख्या बढ़ाने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक शासन की ओर से कोई पहल नहीं हुई है।
ट्रॉमा सेंटर और जिला अस्पताल के विस्तार का प्रस्ताव पूर्व में शासन को भेजा जा चुका है। हाल ही में ईएनटी और एक रेडियोलॉजिस्ट की मांग के लिए भी शासन को पत्र भेजा गया है। डॉ. जेपी मौर्य, सीएमएस जिला अस्पताल