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फर्श पर दर्द से तड़पती रहीं प्रसूताएं

Mon, 22 Aug 2016 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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दर्द से तड़पती प्रसूता - फोटो : अमर उजाला
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जिला महिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं दूर होने का नाम ले रही हैं। सोमवार को यहां पर इलाज के लिए आई प्रसव पीड़िताओं को जमीन पर लिटा दिया गया। पीड़िताएं फर्श पर दर्द से तड़पती रहीं, उनके परिवारीजन डॉक्टरों की मिन्नतें करते रहे लेकिन अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने प्रसूताओं को हाथ तक नहीं लगाया। जांच के लिए मरीजों के तीमारदार घंटों लाइन में लगे रहे उसके बाद उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि समय समाप्त हो गया है।
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कल आना या बाहर जाकर जांच करवा लो। कुछ प्रसूताओं के साथ उनके तीमारदारों को कर्मचारियों ने अंदर नहीं जाने दिया जबकि ओपीडी के अंदर एमआर बाकायदा चिकित्सकों के साथ बैठकर चाय पीते रहे। सोमवार को भी जिला अस्पताल में संवेदनहीनता दिखी। चिकित्सकों की लापरवाही से करीब पांच प्रसूताएं फर्श व बेंच पर तड़पती रहीं। लेकिन उन्हें किसी डॉक्टर ने नहीं देखा।

मसौली थाना क्षेत्र के ग्राम हजरतपुर निवासी प्रसूता मीरा को उसका पति कैलाश प्रसव पीड़ा होने पर उसे जिला महिला अस्पताल में सोमवार सुबह 8 बजे लेकर आया था। डॉक्टरों ने महिला को जांच कराकर फिर दिखाने को कहा। जबकि उसे रविवार को भर्ती करने के लिए बुलाया गया था। मीरा को लेकर उसका पति अस्पताल की पैथालॉजी व अल्ट्रासाउंड कक्ष के चक्कर काटता रहा।
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वहां उसे कहा गया कि अब देर हो गई है जरूरी हो तो बाहर से जांच करवा लो यहां सब मान्य है। बाहर जांच कराने में असमर्थ पीड़िता बेंच पर बैठ कराहने लगी। चार घंटे तक बीत जाने के बाद उसे भर्ती तक नहीं किया गया। रामसनेही घाट के प्रमोद भी पत्नी पूजा को लेकर भर्ती कराने आया था। सुबह नौ बजे डॉक्टरों ने उसे देखा और तीन दिन बाद आने को कह दिया।

जबकि दो दिन बाद उनकी पत्नी का प्रसव होना है। पूजा को फर्श पर लिटाकर प्रमोद डॉक्टरों के चक्कर काटता रहा लेकिन किसी ने नहीं सुनी। मवई के धधवारा गांव निवासी विजय तिवारी भी अपनी बहन शांति को लेकर आए थे। शांति की डिलीवरी डेट करीब 10 दिन बाद थी, लेकिन उसे दर्द होने के कारण वह रविवार को ही ले आए। विजय डॉक्टर से भर्ती करने को मिन्नत करता रहा लेकिन चिकित्सकों ने कहा कि 10 दिन बाद आना। आज भर्ती नहीं करेंगे।

तीन घंटे के बाद विजय अपनी बहन को लेकर एक निजी अस्पताल चला गया। घुंघटेर से राकेश रावत प्रसव पीड़ा से कराहती अपनी बहू कलावती को भर्ती कराने लाए थे। उन्हें डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड कराने को लिख दिया। जबकि एक सप्ताह पहले वह अल्ट्रासाउंड करा चुके हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल के एक कर्मचारी ने कहा कि जांच नहीं हो पाएगी। बाहर चलो कुछ छूट भी करा देंगे। महिला अस्पताल में सुनवाई न होने पर वह मजबूरन बहू को लेकर बाहर जांच कराने चले गए।

वहीं त्रिलोकपुर कस्बे की प्रसूता राकिया बानो पत्नी मो. शाबिर को रविवार को प्रसव के लिए भर्ती कराया था। जिसका नार्मल प्रसव होने के बाद उसे पहले से बेड पर भर्ती मरीज के साथ लिटा दिया गया। परिवारीजनों का आरोप है कि एक बेड पर दो मरीज होने की शिकायत की कई गई तो उसे बाहर निकाल बरामदे में फर्श पर लिटा दिया गया। और कल से कोई उसे देखने तक नहीं आया।  

मरीज बाहर, एमआर अंदर
सोमवार को दूर दराज से उपचार के लिए आए मरीजों को चिकित्सकों से मिलने के लिए घंटाें बाहर खड़ा रहना पड़ा। जबकि अंदर एमआर चिकित्सकों के साथ बैठे रहे। कुछ मरीजों ने विरोध किया तो गेट पर तैनात कर्मचारियों ने डांटकर चुप करा दिया। इस बीच कई तीमारदार अपने मरीजों को लेकर लौट गए तो कई दलालों के चक्कर में फंसकर निजी अस्पताल पहुंच गए।

अपने कमरे से नदारद रहीं सीएमएस
सोमवार को सीएमएस आभा आशुतोष अपने चैंबर से करीब दो घंटे नदारद रहीं। कई मरीज शिकायत व अन्य जानकारी करने के लिए आए तो कमरे में सीएमएस के न होने पर लौट गए। जैसे ही कैमरा मैन ने मैडम की खाली कुर्सी की फोटो खींची, वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने इसका विरोध किया। 

पत्रकारों के अस्पताल में घुसने पर लगाया बैन
अमर उजाला की टीम सोमवार को ओपीडी में मरीजों की समस्याएं जानने के लिए अंदर जाने लगी तो वहां पर तैनात कर्मचारी खालिद ने रोक लिया। कहा कि सीएमएस मैडम ने पत्रकारों को खास कर अंदर जाने से मना किया है। मैडम से परमीशन लाने के बाद ही अंदर जाने दूंगा। 

जिला महिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं के बारे में शिकायतें मिली हैं। एक-दो दिन में निरीक्षण कर सब दुरुस्त कर दिया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी या डॉक्टर की लापरवाही मिलती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। -डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ
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