बाराबंकी। पेट्रोल और डीजल के बढ़े दामों से ट्रांसपोर्टरों और उद्यमियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई पर खर्च बढ़ रहा है, जिससे उत्पादों की लागत में इजाफा होना तय है। पहले से महंगे कच्चे माल और बढ़ती श्रम लागत के बीच ईंधन की नई कीमतें व्यवसायों के बजट को और चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
बाराबंकी की औद्योगिक इकाइयों का मासिक कारोबार लगभग 4000 करोड़ रुपये का है। उद्यमियों के अनुसार डीजल की बढ़ी कीमतें औद्योगिक इकाइयों पर सीधा असर डालेंगी। पहले ही कच्चे तेल के आयात में उतार-चढ़ाव के कारण प्लास्टिक दाना महंगा हो चुका है, जिससे प्लास्टिक उत्पाद और पैकेजिंग के रेट बढ़ चुके हैं।
अब ट्रांसपोर्ट महंगा होने से समग्र उत्पाद लागत और बढ़ेगी। सबसे अधिक असर निर्माण क्षेत्र पर पड़ेगा। सीमेंट, सरिया, ईंट, बालू और अन्य निर्माण सामग्री की ढुलाई पूरी तरह से डीजल पर निर्भर है। इसके चलते निर्माण कार्यों की लागत में करीब पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी संभव है।
पेट्रोल और डीजल के बढ़े दामों
संतोष कश्यप ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय है। कच्चा माल पहले से महंगा है और अब ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से उत्पाद तैयार करने की कुल लागत भी बढ़ जाएगी। इसका असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर साफ दिखाई देगा।
बढ़ाना पड़ेगा किराया
ट्रैवल एजेंसी संचालक ने बताया कि शाहिद डीजल के दाम बढ़ने से सबसे ज्यादा असर हम ट्रांसपोर्टरों पर पड़ा है। पहले ही टायर, मेंटेनेंस और टोल टैक्स का खर्च बढ़ चुका था, अब ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई करना और कठिन हो गया है। अगर यही स्थिति रही तो भाड़ा बढ़ाना हमारी मजबूरी होगी।
दैनिक जरूरी सामान महंगा होने की आशंका
कालिका प्रसाद बाजपेई ने कहा कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से दूध, राशन, सब्जियां और अन्य रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।