टिकैतनगर (बाराबंकी)। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के प्राचीन स्थल गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन बुधवार को वैदिक परंपराओं के साथ हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन वेदी पूजन, शिखर पूजन, न्याय वेदी पूजन, महा रुद्राक्ष अभिषेक और प्रतिष्ठा अनुष्ठान विधिपूर्वक संपन्न हुए। तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान धर्म व संस्कृति का अनूठा संगम दिखा।
इस दौरान सरयू नदी के पावन तट पर स्थित प्राचीन गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में धूप-दीप की सुंगध के बीच हुए रुद्राभिषेक के मंत्रोच्चार से पूरा माहौल भक्तिमय दिखा। यह मंदिर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का एक प्रमुख पड़ाव है और साधकों, तपस्वियों और श्रद्धालुओं के लिए खास तौर पर आकर्षण का केंद्र बनता है।
महोत्सव के बुधवार को विशेष रूप से रुद्राक्ष से किया गया महाभिषेक श्रद्धालुओं के लिए अलौकिक और आध्यात्मिक अनुभव बना। राज्य मंत्री सतीश चंद्र शर्मा भी इस पुनीत अवसर के साक्षी बने। श्रद्धालुओं के साथ मिलकर हवन में आहुति अर्पित किया। आचार्यों के सान्निध्य में भगवान गुप्तेश्वर महादेव का विधिपूर्वक रुद्राभिषेक किया। इस मौके पर कप्तान तिवारी, कमलाकांत द्विवेदी, वीरेंद्र पांडेय, लीलाधर मिश्रा आदेश जैन, अशोक सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
मुख्य आचार्य डॉ. महीधर शुक्ल महाराज ने शिवत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि शिव केवल पूजनीय देवता नहीं, बल्कि एक चेतना हैं। जब हमारे भीतर श्रद्धा होती है और हमारे कर्म संयमित होते हैं, तब ही शिवत्व प्रकट होता है।