हैदरगढ़ (बाराबंकी)। पंप कैनाल भिटौरा से जुड़े किसानों की खेती मनरेगा से संवारी जाएगी। नहर की टेल पटी होने की समस्या अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद डीएम ने इसका संज्ञान लेते हुए मनरेगा से नहर की सफाई व खुदाई कराने के निर्देश दिए हैं। इसे लेकर लघु डाल नहर विभाग ने ब्लॉक को अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दे दिया है।
गोमती नदी के पानी से खेतों की सिंचाई के लिए दशकों पहले स्थापित पंप कैनाल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। रखरखाव के लिए मिलने वाले सालाना बजट की बंदरबांट कर ली जाती है। ऐसे में किसानों को पानी नहीं मिल पाता है।
डीएम सत्येंद्र कुमार के आदेश पर भिटौरा पंप कैनाल की हुई जांच में मिलीं अनियमितताएं इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। पांच क्यूसेक क्षमता की 2560 मीटर लंबी भिटौरा पंप कैनाल के हेड से एक किमी के आगे कभी पानी नहीं पहुंचता है। करीब एक किमी हिस्सा पूरी तरह समतल हो गया, कुछ हिस्सों को कई लोगों ने खेत में मिला लिया है।
इसको लेकर अमर उजाला ने 26 नवंबर के अंक में पानी न पहुंचने से सिंचाई बाधित, किसान परेशान... शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने विभागीय अधिकारियों से प्रकरण की जानकारी ली और मनरेगा से काम कराने के निर्देश दिए।
सहायक अभियंता लघु डाल नहर श्याम कुमार राय ने बताया कि विभाग को सिल्ट सफाई के लिए अलग से बजट नहीं मिलता है। प्रति क्यूसेक रखरखाव के लिए मिली धनराशि में सभी कार्य कराने होते हैं। मनरेगा से नहर पर कार्य के लिए ब्लॉक को एनओसी भेजी गई है। वहीं बीडीओ संजीव गुप्ता ने बताया कि नहर की सफाई के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी।