बाराबंकी। मनरेगा योजना में जमकर धांधली करने के आरोप लगे हैं। जेल में बंद व्यक्ति के नाम जॉब कार्ड बनाकर भुगतान किया जा रहा है। यही नहीं, पंचम वित्त और पंद्रहवां वित्त आयोग के तहत आई धनराशि का जमकर दुरुपयोग किया गया। गांव के ही एक व्यक्ति ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से करते हुए जांच कराए जाने की मांग की है।
सिद्धौर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जमलापुर निवासी अभिषेक कुमार ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र के साथ दिए शिकायती पत्र में लिखा है कि मोहित को चार जून को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि तालाब खुदाई में इसके नाम के जॉबकार्ड पर रुपये निकाले गए। यहीं नहीं, मीना देवी के खेत को समतलीकरण करने के नाम पर 1,71,305 रुपये का खर्च दिखाया गया है, जबकि मौके पर एक रुपये का काम नहीं हुआ है।
इसी प्रकार राजितराम के खेत को समतलीकरण के नाम पर 1,94,814 रुपये, जगरूप के खेत को समतलीकरण के नाम पर 1,45,992 रुपये और रामरूप के खेत के समतलीकरण के नाम पर 1,45,656 रुपये निकाले गए, लेकिन मौके पर जांच कराई जाए तो एक रुपये का काम नहीं मिलेगा। इसी प्रकार नाग बाबा तालाब और जखवा तालाब की खुदाई पर 4,41,000 रुपये का खर्च दिखाया गया है, लेकिन काम एक ही तालाब पर कराया गया। धन का गबन करने के लिए फर्जी नामों से फर्में बनाकर भुगतान करा लिया गया।
हैंडपंपों को रिबोर कराए बिना ही वेबसाइट पर फोटो अपलोड कर दी गई। इसके अलावा कई और कार्यों की जांच करा ली जाए तो भ्रष्टाचार की पूरी पोल खुल जाएगी।
तहसील में बाबू के नाम बना जॉबकार्ड
मनरेगा में भ्रष्टाचार चरम पर है। हैदरगढ़ तहसील में खाद्य एवं रसद विभाग में तैनात महेंद्र के नाम पर जॉबकार्ड बनाकर खेत समतलीकरण में कार्य करते दिखाया गया है। इसी प्रकार दिव्यांशी की शादी तीन वर्ष पहले हो चुकी है और इनको भी खेत समतलीकरण कार्य में लगा दिया गया।
मनरेगा योजना में बिना कार्य कराए भुगतान कराए जाने का मामला जानकारी में आया है, लेकिन अभी शिकायती पत्र नही मिला है। पत्र मिलने पर मामले की जांच टीम बनाकर कराई जाएगी।