बाराबंकी। घाघरा में उफान से तराई के 14 गांवों के लिए खतरा पैदा हो गया है। इन गांवों में रविवार को नदी का पानी पहुंच गया है। इससे भयभीत लोग सुरक्षित स्थान तलाशने लगे हैं। उन्हें किसी भी समय घरों में पानी घुसने का डर सता रहा है। नदी के तेवरों को देखते हुए तराई के सभी एसडीएम को बराबर नजर रखने तथा कर्मचारियों पूरी तरह से सतर्क रहने को कहा गया है।
सिरौलीगौपुर तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 मीटर से थोड़ा नीचे 105.886 मीटर तक पहुंच गया है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे तराई के भैरवकोल, सराय सुरजन, सनावा, बंधौली पुरवा, कोठी डीह, सिरौलीगुंग, बिहड़, भया का पुरवा, सरदहा, तेलवारी, इटहुआ पूरब, गोबरहा, बबुरी और घुटरु गांवों तक पानी पहुंच गया है। यह देख ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। लोग सुरक्षित स्थान तलाश में जुट गए हैं। बहुत से लोगों ने पलायन भी शुरू कर दिया है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के टेपरा गांव को प्रशासन ने पूरी तरह से खाली करा दिया गया है।
ड्रोन कैमरे से हो रही निगरानी
घाघरा के जलस्तर पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे की मदद ली जा रही है। अधिशासी अभियंता बाढ़ उत्कर्ष भारद्वाज के मुताबिक ड्रोन कैमरे की मदद से नदी के जलस्तर की स्थिति का आंकलन कर सकते हैं। इसकी पूरी रिपार्ट डीएम व शासन को भेजी जा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय भी बाढ़ पर बराबर नजर रखे है। प्रतिदिन इसकी समीक्षा की जा रही है। बाढ़ खंड पूरी तरह से सतर्क है।
बाढ़ से प्रभावित होती दो लाख आबादी
बाढ़ से तराई क्षेत्र की सिरौलीगौसपुर, रामनगर और रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र के 450 गांवों की करीब दो लाख की आबादी प्रति वर्ष प्रभावित होती है। इन गांवों के लोग कई माह घर से रहने को मजबूर होते हैं। लोग तटबंध व अन्य स्थानों पर जीवन गुजारने को मजबूर होते हैं।
घाघरा का पानी तेजी से बढ़ रहा है। सिरौलीगौसपुर के करीब 14 गांवों तक पानी पहुंच गया है। इसे देखते हुए एसडीएम को नदी के जलस्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सतर्क किया गया है।
-संदीप गुप्ता, एडीएम