छितरवारा गांव में पार्वती का स्वागत करतीं महिलाएं। स्रोत- परिजन
बाराबंकी। जिला अस्पताल में पांच साल तक रहीं पार्वती शनिवार रात 12 बजे महोबा जिले के अपने छितरवारा गांव पहुंचीं। उनके स्वागत के लिए सुबह से ही परिजन व ग्रामीण इंतजार कर रहे थे। उन्हें देखकर फूलों के संग आंसू भी बरसे। पुत्र, पुत्री, देवरानी, जेठानी, मां, बहन व सास समेत सभी की आंखों में खुशी की आंसू थे। पार्वती तो अपने छोटे पुत्र रामजी को देखकर फफक पड़ीं।
मां-बेटे के मिलन को देखकर सभी का हृदय द्रवित हो गया। हर किसी की आंखों में खुशी के आंसू थे। पार्वती की मां ने भी उन्हें गले लगाकर अपनी ममता के आंचल में ऐसे छिपा लिया मानों कह रही हों कि अब कभी अपने जीते जी अलग नहीं होने देंगी।
पार्वती के स्वागत में घर को फूलों, गुब्बारों व बिजली की झालरों से सजाया गया था। दरवाजे पर वेलकम लिखा था। जिस तरह नई नवेली दुल्हन घर में पहली बार प्रवेश करती है तो अक्षत से भरे लोटे को पैर से लुढ़काती और रंग से भरी थाली में पैर डुबोकर चौखट के अंदर कदम रखती है, उसी तरह सारी रस्में पार्वती ने भी निभाईं।
पार्वती की पुत्री उपमा ने मां के स्वागत में किए गए इंतजाम व अपनों से पार्वती के मिलने की तस्वीरें व वीडियो अमर उजाला से साझा किए। उमपा भी शुक्रवार को अपने पिता विजय व मौसी किरन व मामा के साथ जिला अस्पताल से लेने आई थी। शनिवार दोपहर डीएम शशांक त्रिपाठी ने कलेक्ट्रेट के लोक सभागार में उपहार देकर पार्वती की विदाई की थी।
ऐसे घर पहुंचीं पार्वती
अमर उजाला में पहली मार्च 2025 को शीर्षक- पांच साल से अपनों के इंतजार में पार्वती... से प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर डीएम शशांक त्रिपाठी ने एसडीएम विवेकशील व जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी प्रतिभा यादव को परिवार का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। महोबा जिले की तहसील कुल्पाहर के छितरवारा गांव में पार्वती के परिवार का पता चला। 14 सितंबर 2019 की रात को पार्वती अपने घर से निकली थीं। 18 अक्तूबर 2019 को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डीएम ने पार्वती के बारे में खबर प्रकाशित करने के लिए अमर उजाला के प्रति धन्यवाद भी अपने बयान व सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर दिया है।