मुहर्रम पर ताजिया निकालते अकीदतमंद।
- फोटो : मुहर्रम पर ताजिया निकालते अकीदतमंद।
बाराबंकी। मुहर्रम के अवसर पर जिले में रविवार को गम और अकीदत का माहौल देखा गया। यौम-ए-आशूर के दिन शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में अंजुमनों ने ताजिये का जुलूस निकाला। दिनभर या हुसैन, या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। नौहाख्वानी और सीनाजनी के बीच मातमी अंजुमनें नंगे पैर जुलूस में शामिल हुईं। ताजिये करबला में दफन किए गए। फजलुर्रहमान पार्क में रखे गए ताजिये के साथ अन्य क्षेत्रों के ताजिये भी एकत्र हुए। वहां से जुलूस घंटाघर, धनोखर, निबलेट, बेगमगंज होते हुए करबला पहुंचा, जहां ताजिये दफन किए गए।
मेले जैसा रहा माहौल
धनोखर चौराहे से लेकर बेगमगंज करबला तक माहौल किसी मेले से कम नहीं था। बच्चों के लिए खिलौनों की दुकानें सजीं, झूले भी लगाए गए। पराठा-हलवा समेत खाने-पीने की दुकानें लगीं। सबील भी बांटे गए। इसी तरह जैदपुर, मसौली, हैदरगढ़, सआदतगंज, त्रिलोकपुर, रामनगर, सूरतगंज, दरियाबाद, रामसनेहीघाट, सिद्धौर, त्रिवेदीगंज, भिलवल आदि क्षेत्रों में भी ताजिये दफन किए गए।
ताजिया दफनाने को लेकर विवाद, पहुंचे एसडीएम फोटो
सिद्धौर (बाराबंकी)। कस्बा कोठी में ताजिया दफन करने को लेकर विवाद हो गया। इस पर एसडीएम हैदरगढ़ मोहम्मद शम्स तरबेज खान व सीओ समीर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने दोनों पक्षों की बात सुनी और जमीन की पैमाइश नौ जुलाई को कराने का आश्वासन देकर सुलह कराई। इसके बाद ताजिया दफन कराया। एसडीएम ने दोनों पक्षों को आश्वस्त किया कि परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी ताजिया उसी स्थान पर दफन होगा, जहां हर वर्ष होता आया है। नौ जुलाई को राजस्व टीम भूमि की पैमाइश कराई जाएगी। उसके बाद जो भूमि जिस व्यक्ति की होगी, वह उसका वैधानिक कब्जा ले सकेगा। वार्ता के बाद दोनों पक्ष राजी हो गए। (संवाद)