बाराबंकी। प्रदेश के दूसरे बालिका सुधार गृह में क्षमता से अधिक संवासिनियों को ठहराया जा रहा है। करीब 12 साल से शहर के एक किराए के भवन में संचालित इस राजकीय बालिका संप्रेक्षण गृह में तीस बालिकों के रुकने की क्षमता है। वर्तमान समय में यहां 40 संवासिनियां रह रही हैं। प्रदेश के 12 मंडलों के चालीस से अधिक जिलों की विधि का उल्लंघन करने वाली इन बालिकों को सुधार के लिए यहां ठहराने की व्यवस्था की गई है। मामला न्यायालय में विचाराधीन रहने तक उनके शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन आदि की व्यवस्था महिला कल्याण विभाग की देख रेख में होता है लेकिन संवासिनियों की जिनती संख्या यहां है उसके हिसाब से यह भवन इनके लिए उपयुक्त नहीं है। खास बात तो यह है कि यहां आने वाली महिला आयोग की सदस्य और संबंधित मंत्री भी इस पर गंभीर नहीं है।
शहर के देवा रोड पर स्थित एक निजी भवन को किराए पर लेकर उसमें राजकीय बालिका सुधार गृह संचालित किया जा रहा है। कम उम्र में विधि का उल्लंघन करने के मामले में आरोपित संवासिनियों को यहां लाकर उन्हें सुधारने का प्रयास किया जाता है। मामला न्यायालय में विचाराधीन होने तक इन बालिकाओं को इस गृह में शिक्षा, स्वास्थ्य और खानपान का पूरा ध्यान रखा जाता है। इस बालिका सुधार गृह में संवेदनहीनता की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है। तीस लोगों के क्षमता वाले इस सुधार गृह में चालीस संवासिनियों को ठहराया जा रहा है। यह हाल तब है जब समय-समय पर महिला आयोग की सदस्य और संबंधित विभाग की मंत्री इसका औचक निरीक्षण करने आती हैं।
विधि का उल्लंघन करने वाली 12 मंडलों लखनऊ, वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, प्रयागराज, बस्ती, देवीपाटन, अयोध्या आदि की करीब चालीस से अधिक जिलों की बालिकाओं को यहां लाया जाता है। यहां उनके शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद और खानपान का पूरा ध्यान महिला कल्याण विभाग की देखरेख में किया जाता है। प्रदेश में गाजियाबाद और बाराबंकी में ही बालिकाओं के सुधार गृह है। मामला न्यायालय में विचाराधीन रहने तक इन्हें यहीं रखा जाता है।
संवासिनियों की बढ़ती संख्या के बाद महिला कल्याण विभाग शहर में नए भवन की तलाश करने का दावा कर रहा है। लेकिन संवासिनियों की संख्या के आधार पर सुव्यवस्थित भवन न मिलने की बात कह रहा है। लॉकडाउन के चलते नए भवन की तलाश में देरी होने की जिम्मेदार अधिकारी बात कह रहे हैं।
राजकीय बालिका सुधार गृह में 40 संवासिनियां रह रही है। इस भवन में तीस लोगों के रुकने की क्षमता है। नए भवन की तलाश की जा रही है। अनिल कुमार मौर्या, जिला प्रोबेशन अधिकारी।