अपने नवाचार का प्रदर्शन करती एक छात्रा।
- फोटो : amar ujala
बाराबंकी के जीआईसी ऑडिटोरियम में आयोजित इंस्पायर अवार्ड मानक प्रदर्शनी में 273 छात्रों ने नवाचार और विज्ञान के ऐसे मॉडल पेश किए जिन्होंने सभी को चकित कर दिया। किसी ने बिजली रहित वाशिंग मशीन बनाई, तो किसी ने बाइक के लिए एयरबैग सिस्टम। स्मार्ट ट्रैफिक, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समस्याओं पर केंद्रित इन मॉडलों ने यह साबित किया कि छोटी उम्र में भी वैज्ञानिक सोच बड़े बदलाव ला सकती है।
273 छात्र-छात्राओं ने दिखाई विज्ञान की उड़ान
बाराबंकी समेत दो अन्य जिलों से आए कक्षा 6 से 10 तक के 273 छात्र अपने विज्ञान प्रोजेक्ट्स के साथ पहुंचे। बच्चों ने न सिर्फ अपने मॉडल प्रस्तुत किए बल्कि वहां मौजूद दर्शकों को उसकी कार्यप्रणाली और उपयोगिता भी समझाई।
ये भी पढ़े- UP: 'ये कांवड़िये नहीं गुंडे हैं..', स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर बवाल, हिंदूवादी संगठन का घर के बाहर हंगामा
बच्चों के प्रमुख नवाचार
पैर से चलने वाली वाशिंग मशीन
एक छात्र ने ऐसी वॉशिंग मशीन तैयार की जो बिजली के बिना पैर के दबाव से काम करती है। यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
बाइक में एयरबैग सिस्टम
एक होनहार छात्र ने टू-व्हीलर के लिए सेंसर आधारित एयरबैग सिस्टम बनाया, जो दुर्घटना के झटके को महसूस कर तुरंत एक्टिवेट होता है और राइडर की सुरक्षा करता है।
हाथ के इशारे से रुकने वाली कार
कक्षा 8 के छात्र ने एक सेंसर-कार डिजाइन की, जो सामने किसी के हाथ दिखाने पर स्वतः रुक जाती है। यह स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।
तालाब संरक्षण तकनीक
गर्मियों में तालाब सूखने और पानी गर्म होने की समस्या पर एक छात्रा ने कवर सिस्टम डिजाइन किया, जो सूरज की किरणों से पानी की वाष्पीकरण दर को कम करता है।
ये भी पढ़े- Ayodhya: राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का दावा- 18 महीने में छह करोड़ श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन
गांव, पर्यावरण और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बने प्रोजेक्ट्स
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने बताया कि बच्चों के अधिकांश मॉडल ग्रामीण समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और दुर्घटना रोकने पर केंद्रित हैं। यही इनकी सबसे बड़ी खासियत है। प्रदर्शनी में मौजूद शिक्षकों और वैज्ञानिकों की टीम ने भी बच्चों की सोच और निष्पादन क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों के भीतर की वैज्ञानिक ऊर्जा को दिशा देती हैं और भविष्य के वैज्ञानिकों की नींव रखती हैं।